संत रविदास वार्ड: निर्दलियों के चुनाव मैदान में कूदने से भाजपा-कांग्रेस का बिगड़ सकता है चुनावी समीकरण

छत्तीसगढ़ राजनिति

रायपुर। रायपुर पश्चिम संत रविदास वार्ड क्रमांक 70 में इस बार पार्षद के लिए 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। वार्ड क्रमांक 70 में परिसीमन के बाद अब मतदाताओं की संख्या बढ़ गई है और नये उम्मीदवार भी इस बार भाग्य आजमा रहे है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनावी मैदान में उतरने से अब भाजपा-कांग्रेस की राह आसान नजर नहीं आ रहा है। वार्ड में लगभग 16 हजार मदाता है और निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से चुनावी समीकरण पूरी तरह से बिगडऩे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रायपुर पश्चिम वार्ड क्रमांक 70 में सरोना बस्ती, ईटा भट्ठा, संजय नगर, रेलवे स्टेशन, चंदनीडीह, और कुछ हिस्से आते हैं। पिछले सोला साल से वार्ड पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित रहा है। इतने लंबे अंतराल के बाद वार्ड का परिसीमन के बाद वार्ड सामान्य घोषित किया गया है। सामान्य सीट से लड़े जाने वाले वार्ड में प्राय: निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या तो बढऩा स्वाभाविक है। वहीं यह बात भी गौर करने लायक है कि अब सरोना बस्ती में कई कालोनियां भी है, जिनके मतदाता इस वार्ड से जुड़ गये है। पुराना इतिहास खंगाले उक्त वार्ड में तो भाजपा प्रत्याशी का दबदबा रहा है। किंतु ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी के गलत नीतियों के चलते वार्ड क्रमांक 70 में पहली दफा कांग्रेस ने हाथ मार लिया है और देखते ही देखते विधायक की सीट भी भाजपा की झोली से चली गई। माना जा रहा है कि इस बार भी गलत प्रत्याशी निर्धारण के चलते भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती है क्योंकि ऐसा बताया जा रहा है कि बीस साल से काम करने वाले भाजपा के पार्षद प्रत्याशी के प्रबल दावेदार को ही अंतिम दौर में किनारा लगा दिया गया, जिससे भाजपा के कई कार्यकर्ता भी नाराज दिख रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 70 में भाजपा ने ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतारा है जिसने पिछले पांच साल के दौरान कांग्रेस का झंडा थामा था। मतदाताओं का मानना है कि आखिर भाजपा को अपने प्रत्याशी कार्यकर्ता पर भरोसा नहीं है जो कि दूसरे प्रत्याशी को मैदान में उतार दिया है। वार्ड क्रमांक 70 में भाजपा से राजेश ठाकुर और कांग्रेस से अशोक ठाकुर मैदान में है। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनो प्रत्याशी एक ही परिवार से आते है। वहीं भाजपा से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरने वाले कामेश सिंह ठाकुर का भी वार्ड में दबदबा देखा जा रहा है। उनके मैदान में उतरने से भाजपा भी सकते में है। वार्ड क्रमांक 70 रायपुर से लगा है और यहां से पुराने कई दिग्गज चुनाव जीत कर पार्टी के उपर पहुंचे थे चाहे वो तरुण दा हो या राजेश मूणत। यह वार्ड शुरू से ही भाजपा का ही गढ़ रहा है। तरुण दा के पार्टी बदलने से यहां भाजपा के राजेश मूणत को पहली बार पश्चिम विधायक के लिए प्रत्याशी घोषित किया गया था और वे भारी वोटों से जीतकर विधायक से मंत्री तक का सफर तय किया। वार्ड क्रमांक 70 में मतदाताओं की ओर देखा जाये तो जातिगत राजनीति शुरू से ही हावी रही है। अब देखना यह है कि वार्ड में नये शहरी मतदाताओं का भी नाम कालोनियां बन जाने से मतदाता सूची में आ गया है। उनका झुकाव किस ओर जाता है यह भी महत्वपूर्ण संकेत देगा। मतदाताओं का झुकाव निर्दलीय प्रत्याशी उगता सूरज चुनाव चिन्ह में चुनाव लड़ रहे कामेश सिंह ठाकुर ओर से देखा जा रहा है जिससे दोनों पार्टी का चुनाव समीकरण बिगड़ सकता है। जमीनी स्तर से जुड़े कामेश सिंह ठाकुर के मैदान में उतरने से उनके समर्थकों में भारी उत्साह नजर आ रहा है। यहां के नागरिकों का कहना है कि ऐसे पैसे वाले प्रत्याशियों को जो मतदाताओं को अपना गुलाम समझते है उन्हें जवाब देने का मौका आ गया है। वार्ड के नागरिकों का मानना है कि भाजपा से बाहरी प्रत्याशी मैदान में उतरने से कार्यकर्ता नाराज है जिससे भाजपा को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। वार्ड क्रमांक 70 में कुल लगभग 16 हजार मतदाता है। चुनाव मैदान में कुल तेरह प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे है। निर्दलियों के मैदान में आने से इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों का चुनावी समीकरण बिगड़ता नजर आ रहा है।

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