संत पवन दीवान की खड़ाऊ इस लेखक ने सहेज कर रखा है…

छत्तीसगढ़

रायपुर। छत्तीसगढ़ का गांधी कहे जाने वाले पवन दीवान की चरण पादुका अभी भी राजधानी के कुशालपुर स्थित विनोबा भावे नगर के निवासी पवन पुराणिक ने सहेज कर रखी है। यह उन्हें साहित्य साहित्य सम्मेलन के दौरान आयोजकों ने दी थी । तभी से वह संत दीवान की चरण पादुका को अपने निज निवास में रखे हैं। पवन पौराणिक स्वयं भी लेखक है इसी वजह से भी पवन दीवान के साथ उनके मधुर व आत्मिक संबंध रहे थे। श्री पौराणिक ने वय : से वैराग्य भाग 3 में अपनी कविता संग्रह में पवन दीवान के बारे में लिखकर उनके प्रशंसकों के बीच भूली यादें और तरोताजा कर दी है। उन्होंने लिखा है पवन दीवान क्या थे ? बताओगी जनता। सुनते थे सबका पर करते थे मन का। ऊपर वाले ने पवन दीवान सिंगल पीस बनाया था, कोई गेरू गमछा कहीं भी ले तो पवन दीवान नहीं बनता। जीवन के अनेक खुशियों के फूल, उन्हीं के सहयोग से मिला। जीवन भर उनके सहयोग का चलता रहा सिलसिला। पवन दीवान के सहयोग को, अजीवन भूल नहीं सकता, जीवन के कठिन मोड़ों पर मुझे, उनका भरपूर सहयोग मिला। देशभर में बुधवार 1 जनवरी को नव वर्ष के जश्न में डूबा रहा तो वही राजिम स्थित किरवाई गांव में पवन दीवान की जयंती मनी । इसी क्रम में श्री पौराणिक ने भी कवि दीवान को नमन करते हुए उन्हें याद किया। उन्होंने भावुक होकर बताया कि वह साहित्य के क्षेत्र में सूर्य थे इसके अलावा एक अच्छे कवि, वक्ता के रूप में जाने जाते थे। उनके जैसा ना कोई था और ना कोई रहेगा।

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