साहित्य का जो आदित्य था, धर्म मंच में जिनका सम्मान था, जन जन के जननायक थे , वह पवन दीवान था…

छत्तीसगढ़


संत कवि पवन दीवान के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन


राजिम।छत्तीसगढ़ के ख्यातिप्राप्त भागवताचार्य एवं संत कवि पवन दीवान के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर अंचल के सक्रिय साहित्यिक संस्था त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा जिला गरियाबंद के तत्वाधान में ग्राम किरवई में नववर्ष की गुलाबी शाम में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ गीतकार किशोर कुमार निर्मलकर द्वारा मां शारदे की वंदना साथ हुआ। इसके बाद प्रसिद्ध कवि मकसूदन साहू बरीवाला ने भारतीय संस्कृति पर शानदार रचना पढ़ी,तो युवा कवि छग्गू यास अडील ने हास्य व्यंग्य एवं श्रृंगार रस के साथ नववर्ष का धमाका किया। अगले कवि के रूप में महासमुंद से पधारे सुरेंद्र कुमार अग्निहोत्री, आगी ने अपनी छोटी छोटी टुकड़ियों के माध्यम से आग लगाने का भयानक काम किया, गीतकार थानु राम निषाद अकेला ने मांं पर करुण रस से परिपूर्ण मार्मिक रचना प्रस्तुत किया । डॉ मोतीलाल साहू ने वर्तमान परिदृश्य में आदमी की तुलना सांप से करते हुए यथार्थ परक व्यंग्य रचना पढ़े,तो कोपरा से पधारे हलधर नाथ योगी ने बफे सिस्टम की धज्जियाँ उड़ाते हुए वर्तमान व्यवस्था पर करारा प्रहार किया ।इसके बाद मंच संचालन कर रहे श्रवण कुमार साहू,”प्रखर”ने अगले कवि के रूप में किशोर निर्मलकर को बुलाकर मानो आफत मोल ले लिया जिन्होंने हेमलेट एवं पति पत्नी की तीखी नोक छोक को अपनी रचनाओं के माध्यम से परोसकर लोगो को हंसने के लिए मजबूर कर दिया तो,युवा कवि रामेश्वर रंगीला ने गजल के माध्यम से मंच को ऊंचाई प्रदान किया,तो गजानन माधव मुक्तिबोध सम्मान से सम्मानित कवि संतोष कुमार साहू, प्रकृति ने बच्चों के मनमाफिक रचना पढ़कर उन्हें भी हंसने का भरपूर मौका दिया ,तो रोहित माधुर्य ने पति पत्नी पर शानदार रचना पढ़कर खूब वाहवाही लूटी, हास्य व्यंग्य के कवि गोकुल सेन ने छोटी छोटी टुकड़ियों के माध्यम से लोगों को खूब हंसाया।तो महासमुंद से पहुंचे कवि डॉ रामशरण चंद्राकर ने श्री दीवान के ऊपर शानदार रचना प्रस्तुत किया, तो हास्य व्यंग्य एवं गीतों से पहचान बनाने वाले कवि श्रवण कुमार साहू,”प्रखर”ने संत पवन दीवान पर लाजवाब रचना पढ़ते हुए कहा,,,,साहित्य का जो आदित्य था,धर्म मंच में जिनका सम्मान था,जन जन के जननायक थे जो, वही तो पवन दीवान था।आभार प्रदर्शन मोहनलाल मानिकपन, भावुक ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *