अपनों के बीच भी क्यों सुरक्षित नहीं महिलाएं…!, पढ़ें पूरी खबर…

क्राइम देश


नई दिल्ली। देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जाती है। महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हेल्प लाइन भी शुरू किए गए है। लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉडर््स ब्यूरो की जो रिपोर्ट सामने आई है उससे ऐसा लगता है कि महिलाएं अपनों के बीच सुरक्षित नहीं है। ब्यूरो की रिपोर्ट बेहद चौकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में दर्ज हुए दुष्कर्म के मामलों में रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 94 फीसदी मामलों में दुष्कर्म करने वाले लोगों पीडि़ता की जान पहचान के ही थे। महिलाओं के साथ होने वाले यौन अपराधों की गंभीरता को दर्शाती हुई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि युवतियां और महिलाएं अपने घरों, आस-पड़ोस और कार्यस्थलों में भी सुरक्षित नहीं है। साल 2018 में दुष्कर्म के 33,356 मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 2,780 मामलों में अपराधी परिवार का ही कोई सदस्य निकला था। रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में दर्ज हुए सभी मामलों में से 15,972 मामलों में आरोपी पीडि़ता का कोई जान पहचान वाला ही निकला। इसमें पड़ोसी, परिवार का कोई मित्र या जहां पीडि़ता नौकरी करती थी उसका मालिक ही था। वहीं, 12,568 मामलों में आरोपी या तो दोस्त था या फिर ऑनलाइन फ्रेंड या लिव-इन पार्टनर निकला, जिसने लड़कियों या उन महिलाओं को जो अपने पति से अलग हुईं थी शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया था। साल 2018 में दुष्कर्म के दर्ज हुए सभी केसों में से सिर्फ 2,036 मामले ऐसे निकले जिसमें आरोपी या तो अज्ञात था या फिर उसकी पहचान नहीं हो सकी है। 33,356 केस में से 31,320 मामलों में अपराधी पीडि़ता की पहचान का था। रिपोर्ट के मुताबिक दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश (5,209) में सामने आए। इसके बाद राजस्थान में 3,748, उत्तर प्रदेश में 3,718 केस दर्ज हुए। देश की राजधानी दिल्ली में 1,215 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए। इनमें से अकेले दिल्ली में ही 1,194 मामलों में आरोपी पीड़़िता का परिचित निकला। रिपोर्ट के मुताबिक दुष्कर्म की शिकार हर उम्र की महिलाएं बनी हैं। इसमें नाबालिग बच्चियों से लेकर 60 साल से ऊपर की उम्र की बुजुर्ग महिलाएंं भी शामिल हैं।

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