नियमों को बंधन नहीं समझना चाहिये:घोरे

छत्तीसगढ़


कोरबा। हमर अंगना घरेलु हिंसा के विरूद्ध प्रयास योजनान्तर्गत एवं नालसा के निर्देशानुसार संविधान की प्रस्तावना के संबंध में संवेदीकरण कार्यक्रम ज्योतिभूषण प्रताप सिंह विधि महाविद्यालय कोरबा में आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि राकेश बिहारी घोरे, विशिष्ट अतिथि प्रवीण कुमार प्रधान, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा थे। जिला न्यायाधीश के द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि सुयोग्य शासन के लिये विधि का निर्माण हुआ है। जब हम घर के लिये एक नियम बनाते है उसी तरह एक समाज, एक देश के लिये भी नियम बनता है। नियमों को बंधन नहीं समझना चाहिये। नियम सुव्यवस्था के लिये होता है। इसलिये नियमों का अनुशरण करना चाहिये। नियमों का उल्लघंन व्यक्ति रूप से हानि पहुंचाता है साथ ही सामाजिक तौर पर नुकसानी पहुंचाता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। मनुष्य को केवल प्राणी होना चाहिये न कि पशु, जो विधान के विरूद्ध कार्य करते है ऐसे व्यक्ति असमाजिक तत्व या असमाजिक प्राणी होते है इनके लिये दण्ड का प्रावधान है। अपराध दो तरह के होते है एक अनजाने में होता है तो दूसरा अपराध प्लांिनंग के साथ सोच समझकर किया जाता है। संयम और अनुशसन से ही अपराध को कम किया जा सकता है। आपका चरित्र अच्छा है तो अपराध नहीं होगा इसलिये हमेशा अच्छा चरित्र रखें। आत्मविश्वास तब होता है जब हम मेहनत करते है। मेेहनत कब करते है जब कोई कार्य में हमें रूचि या समझ हों। समझने के लिये समझाना आवश्यक है। समझ तब आयेगा जब आपमें उसमें रूचि होगी। जिसमें रूचि नहीं है एैसा कार्य क्षेत्र न चुने और अपने से छोटे भाई-बहनों को करने से दबाव बनाये। एैसा करने से व्यक्ति सफल नहीं हो सकता है। इसके अतिरिक्त विधि के छात्र को राष्टीय चरित्र निर्माण करने में जोर दिया गया आपका चरित्र अच्छा होगा तो अपराध भी कम होगें। संयम एवं इन्द्रजीत होना चाहिये अपनी इच्छाओं को कम करना सीखना चाहिये। इन्द्रियों ही मानव को अपराध की ओर धकेलता है। इसके अतिरिक्त विधि के छात्रों के द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब ब?ी ही सरलता पूर्वक दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रवीण कुमार प्रधान प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा के द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि संवधिान में बहुत से अनुच्छेद है लेकिन 3 अनुच्छेद अद्भूत है इनमें से अनुच्छे 14, 20 एवं 21 है। अनुच्छेद 14 के अंतर्गत विधि के समक्ष समता और समान साक्षर, अनुच्छेद 20 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अभियोजित किया जाएगा जब वह किसी कानून का उल्लंघन करता है। उसे उसी अपराध के अनुपात में दंड दिया जाता है। किसी भी व्यक्ति को अपने विरूद्ध गवाही देने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है। एक व्यक्ति को एक अपराध के लिये 2 बार दंड नहीं दिया जा सकता है तथा अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके कारण बड़े से बड़े अपराधियों को भी तुरत सजा न देकर विधि के अनुसार न्यायालय में विचारण किया जाता है। संविधान में ऐसा ही व्यवस्था दी गई है। इसके तहत् प्रत्येक अपराधी को भी जीवन जीने का अधिकार है, उसके मृत्यु के पश्चात् भी जिस धर्म का व्यक्ति है उसे उसी धर्म के अनुसार अंतिम सस्कार करने का भी अधिकार दिया गया है। इसके अतिरिक्त मोटर वेल्किल एक्ट की जानकारी देते हुये आर.सी. बुक एवं बीमा के कागजात में बीमा कराते सयम चेचिंस नंबर एवं इंजन नंबर का मिलान करने की सलाह दी गई ताकि भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा जा सकें। कु. सीमा जगदल्ला सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के द्वारा घरेलु हिंसाओं से महिलाओं का संरक्षण से संबंधित कानूनी जानकारी दी गई। पैरालीगल वॉलीण्यिर्स एवं लीगल एड क्लीनिक के जानकारी देते हुये कहा गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा विधिक सेवा योजनाओं के प्रचार-प्रसार करने हेतु विधिक सेवा केन्द्र खोला गया है जिसमें पी.एल.व्ही. एवं पैनल लायर के द्वारा कार्य किया जाता है। उक्त अवसर पर श्री एच.के. पासवान, प्राचार्य, विधि महाविद्यालय के द्वारा सभी मुख्य अतिथि एवं प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया गया।

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