विशेषज्ञों ने कृषि निर्यात एवं कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत बताई

एजुकेशन छत्तीसगढ़


रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ, नई दिल्ली (आईसा) के 5वें दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा अधिवेशन का आज यहां समापन हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अधिवेशन के समापन समारोह के मुख्य अतिथि कृषि वैज्ञानिक चयन मण्डल के पूर्व अध्यक्ष एवं राहुरी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. सी.डी. मायी थे। समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ने की। आणंद कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एन.सी. पटेल, भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ के कार्यकारी सचिव डॉ. आर.पी. सिंह और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल के सदस्य आनंद मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कृषि वैज्ञानिकों एवं संस्थानों को आईसा अवार्ड से सम्मानित किया गया। अधिवेशन के तकनीकी सत्रों के दौरान सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र तथा पोस्टर प्रस्तुत करने वाले युवा वैज्ञानिकों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सीडी मायी ने इस अवसर पर कहा कि विगत वर्षों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बावजूद देश में खाद्यान फसलों एवं उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई है और आज इनका सुरक्षित भण्डारण एक बड़ी समस्या बन गया है। विडंबना यह है कि उत्पादन में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों की माली हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को अब कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसलों के निर्यात पर अधिक ध्यान देना चाहिए जिससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पाटील ने कहा कि अब विश्वविद्यालयों को शिक्षा केन्द्रों के रूप में स्थापित करने के बजाय ज्ञान और उत्कृष्टता केन्द्रों के रूप में स्थापित किये जाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों को अपने विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने पर अधिक ध्यान देना चाहिए जिससे पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या में कमी आ सके। अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ के इस दो दिवसीय अधिवेशन की थीम ‘‘अगली पीढ़ी का कृषि नवाचार: चुनौतियां एवं कृषि से संबद्ध क्षेत्रों में स्थायी रोजगार सृजन के लिए अवसर’’ रखी गई है। इस थीम के अंतर्गत कुल पांच तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। अधिवेशन के प्रथम दिवस तीन तकनीकी सत्रों एवं अंतिम दिवस दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें युवा कृषि वैज्ञानिकों, कृषि छात्रों एवं विषय विशेषज्ञों ने संबंधित विषयों पर अपने विचार रखे। आईसा अवार्ड के तहत कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व का पुरस्कार भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह को दिया गया। हरित रत्न पुरस्कार से तमिलानाडू कृषि विश्वविद्यालय कोयंबटूर के कुलपति डॉ. एन. कुमार को सम्मानित किया गया। इसी प्रकार उत्कृष्ट संस्थान का पुरस्कार डॉ. वाय.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन हिमाचल प्रदेश एवं प्रो. जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय, हैदराबाद को प्रदान किया गया। इस दो दिवसीय अधिवेशन में 20 राज्यों के 25 कृषि विश्वविद्यालयों के लगभग 600 विद्यार्थी शामिल हुए। अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ के राज्य अध्यक्ष विकास लुनावत ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, कृषि विशेषज्ञ, युवा वैज्ञानिक एवं कृषि उद्यमी उपस्थित थे।

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