गणतंत्र दिवस पर कवि श्रवण साहू ने कविता लिखकर शहीदों को दी सलामी, पढ़े पूरी कविता …

छत्तीसगढ़

💐शहादत को सलाम💐
भारत माँ का बच्चा -बच्चा ,
जब तेरी याद में रोया था।
ये मत पूछो तेरे पीछे किसने,
क्या -क्या खोया था??
*माँ की गोदी सुनी हो गई,
जिसमें तूने खेला था।
घर आँगन भी सुने हो गये,
जिसमें सुख दुख झेला था।।
माँ की छाती छलनी हो गई,
जब आसमां भी रोया था।
*घर का कुलदीपक था वो तो,
पिता का अभिमान था।
गाँव का भोला -भाला बेटा,
भारत माँ का शान था।।
बाप का हिम्मत टूट गया था,
जिस दिन बेटे को खोया था।
*मेहंदी का रंग उड़ गया,
जब कंगन चूड़ी टूटे थे।
हाय विधाता जिस दिन तुने,
माँग से सिंदूर लुटे थे।।
बंधन टूटा, साथ भी छूटा,
जो बीज प्रेम का बोया था।
*हाथ मे रेशम की डोरी ले,ब
हना जब ये पूछती है।
कब आएगा मेरे भैय्या,
कोई तीर सीने में चुभती है।।
बहन की डोली उठाने वाला,
पता नहीं क्यूँ सोया था?
*मासूम बच्चे जब यह कहते,
पिताजी कब आएंगे ।
गुड्डा -गुड्डी ,खेल -खिलौने,
मेरे लिए कब लाएंगे ।।
उस अनाथ को कौन बताए,
जिसने बचपन खोया था।
*मेरे साथी ,मेरे भाई,
क्यों तू मुझसे रुठ गया ?
तेरा मेरा खून का रिश्ता,
क्यूँ इतनी जल्दी टूट गया?
आज किशन ने बलराम,
जैसे भाई को खोया था।।
*मरते दम जिसने यारों,
दुश्मन से लोहा लिया था।
देश की शान बचाने खातिर,
अपने प्राण को दिया था।।
अमर रहो मेरे वीर जवान,
यह कहके हर कोई रोया था।।
रचनाकार-श्रवण कुमार साहू,”प्रखर”राजिम,(छ. ग.)

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