भक्तों की रक्षा के लिए ही भगवान का होता है अवतरण-पं. शास्त्री

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खंडवा। नानी बाई के ससुराल पक्ष ने सवा 25 मन सुपारी, सवा 25 मन रौली, 80 हजार सोने की मोहरें, 1 करोड़ रुपए रोकड़ व 2 सोने की ईंट मायरा पत्रिका में मांगी थीं। इस पर भी नरसी व्यथित नहीं हुए, क्योंकि उन्हें अपने ठाकुर पर पूरा विश्वास था। मायरा देने के लिए साथ चलने के लिए नरसी ने अपने भाइयों-नगरवासियों को आग्रह किया, लेकिन उनकी दशा देखकर कोई उनके साथ नहीं लगा। भगवान नरसीजी के लिए 56 करोड़ के मायरा की सामग्री लेकर के भगवान स्वयं पधारे। यह उद्बोधन रामनगर कालोनी के गरबा चौक में चल रही नानी बाई मायरो के विश्राम दिवस के अवसर पर कथावाचक पं विजय जी शास्त्री ने कही। श्रीमद् भागवत कथा विश्राम दिवस पर पं. नवीन शास्त्री ने सुदामा चरित्र कथा का सुंदर वर्णन प्रस्तुत किया। यह जानकारी देते हुये समिति प्रवक्ता मुकेश अनंत कुलकर्णी ने बताया कि पं. शास्त्री ने कथा में कहा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त की गाड़ी पार करने के लिए कारीगर बन गाड़ी सुधारने के लिए आए और भक्त की गाड़ी को उन्होंने स्वयं ही संभाल लिया। जब भक्त की बैलगाड़ी भगवान के हाथ में आ जाती है तो उस भक्त का कल्याण तय है। उन्होंने नरसी की चिंता दूर करते हुए 56 करोड़ का भात भरा, जो कि नानी बाई के ससुराल पक्ष से आई मायरा पत्रिका से 4 गुणा बड़ा था। इस प्रसंग के तहत आकर्षक सजीव झांकी सजाई गई, जो श्रद्धालुओं में आकर्षण का केंद्र रही। अंतिम दिनों में भीड़ के कारण पण्डाल खोलने पड़े, कुछ भक्तों ने पण्डाल के बाहर ओटले पर बैठकर भी कथा का आनंद लिया। कथा में समिति के नरेंद्र चौहान, संतोष खेडेकर, मनोज कुलकर्णी, गिरवर पटेल, हरिणाराय चौहान, गोपाल गुहा, निर्मल मंगवानी, जगदीश डंगरोले, संगीता खेडेकर, सीताराम शाक्य, अनिल मालवीया, सुनीता पटेल, शोभा मालवीया, राजकुमारी शाक्य, डिम्पल चौरासिया, सुनीता डंगरोले, डां. राजू, डां. नरेंद चौहान, जितेंद पटेल, मामाजी खोड़े, माधव शांडिल्य, राधेश्याम चंद्रोडे, सुंदरसिंह गुर्जर, केएन भट्ट, मोनू पाटिल आदि सहित आसपास गांवों के भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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