ददा मोर पेशन ला मगा देतेव त मोर खायेपिये बर हो जातिस तोर पाव परत हव ददा …

छत्तीसगढ़

By। अविनाश वाधवा


तिल्दा नेवरा ।राजधानी के करीब ही तिल्दा नेवरा में रहने वाली अम्बिका वर्मा बताती है आज तक उसे वृद्धा या विधवा पेंशन नहीं मिली है। नगर पालिका द्वारा बनाये गए दुकानों में एक का शटर को खोल कर अपना रैन बसेरा बना के रहने वाली अम्बिका वर्मा के दो बेटे हैं। दो बेटो में एक की मौत हो चुकी है और अम्बिका वर्मा वृद्धा या विधवा पेंशन के लिए दर दर ठोकर खा रही है। वह तिल्दा नेवरा वार्ड नम्बर 06 की निवासी है।उनकी उम्र लगभग 70 वर्ष है । उम्र के इस पड़ाव में अभी तक उनको विधवा पेंशन नहीं मिली है। बुजुर्ग महिला जवान बेटे के मौत के बाद अम्बिका वर्मा अकेली हो गई है ।उसे पास रहने के लिए न घर है न परिवार है न पैसे कमाने के साधन ऐसे में उसके पास विधवा पेशन से अपना खर्चा चलाती लेकिन कभी विधवा पेशन नहीं मिलने के कारण दर दर भटक रही है । इस परिस्थिति में वह नगर पालिका के चक्कर लगा रही है और वह भुखमरी के कगार पर है।लोगो को अपनी व्यथा बताते हुए वो कहती है,


मांग मांग के खाने के लिए मजबूर हो गई है
एक बेटा शहर में ही हमाली का कार्य करता हैं। पति को मरे हुए वर्षों बीत गए है लेकिन उन्हें अभी तक विधवा पेंशन की एक किश्त भी नहीं मिली। उम्र तो उन्हें याद नहीं लेकिन कहती हैं, “क्या कम, 70 साल के तो हो होंगे। अम्बिका वर्मा बताती हैं, “हमको कहते हैं कि पेन कॉर्ड ले आओ, खाता खुलवा लो, मृत्यु प्रमाण पत्र ले आओ लेकिन वो अभी बने नहीं हैं।” ले देके खाता खुलवाया है अब पेंशन के लिए धक्के खा रही है।

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