सृजन की शाम सदाबहार गजल सुनकर झूमे श्रोता

छत्तीसगढ़ मनोरंजन

रायपुर। सुर सृजन म्यूजिकल ग्रुप द्वारा मशहूर ग़ज़लों की एक शाम, शाम ए ग़ज़ल वृन्दावन हॉल में आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगीत के सभी रसिकजनों ने शिरक़त की। वहीं गजलों की फरमाइश पर कलाकार दीपक व्यास, प्रज्ञा त्रिवेदी, अतीक उर्रहमान बसन्त सोनी और रघु शास्त्री ने 
ये दौलत भी ले लो,चुपके चुपके रात दिन, सरकती जाए है, तुम अपना रंजो गम, आज जाने की ज़िद न करो, ग़म का खज़ाना तेरा भी है, चल मेरे साथ ही चल, अपने होठों पर सजाना चाहता, ये ग़ज़ाल सी निगाहें, दिल मे एक लहर सी, आप जिनके क़रीब होते, आते आते मेरा नाम सा, तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है, सुना था के वो आएंगे अंजुमन में, हम तो परदेस में, और आहिस्ता कीजिये बातें, जैसी सदाबहार ग़ज़लें प्रस्तुुुत की ।

हार्मोनियम पर दीपक व्यास, तबले पर ओम प्रकाश भोई, की बोर्ड पर धीरज ठाकुर, गिटार पर अतीक उर्रहमान ने शानदार संगत की। गजल देर रात तक जारी रहा , जिसे श्रोता सुनकर झूम उठे । इस कार्यक्रम में नीलिमा डोनगांवकर ,अशोक त्रिवेदी,दीपा व्यास, योगेश व्यास, राखी व्यास, हर्षद व्यास, स्वाति व्यास, धर्मेंद्र रावल, पारुल रावल, राजेश चांडक समेत अनेक संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। 
कार्यक्रम का संचालन रचना चांडक और वर्षा रावल ने किया।

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