एक सरपंच ऐसा भी जो हर पल लोगों की सेवा के लिए रहते हैं तत्पर

छत्तीसगढ़

by। अविनाश वाधवा


तिल्दा-नेवरा | तिल्दा-नेवरा ब्लाक के ग्राम पंचायत सिनोधा के सरपंच लक्ष्मण गिरी की समाज सेवा एक मिसाल बनता जा रहा हैं | यहां के ग्रामीण बताते है कि वे सच्ची, निष्ठा और लगन के साथ लोगों की सेवा में जुटे रहते हैं | सरपंच के इस भाव को देखकर गाँव के लोग भी सहसा उनसे जुड़ जाते हैं | सरपंच लक्ष्मण गिरी अपने इस अंदाज के चलते लोगों के बीच काफी लोकप्रिय होते जा रहे है | लोगो ने भी उनकी सामाजिक लगन और सेवा भाव को देखकर गाँव की महिलाओं ने उसे ही सरपंच बनाने की ठानी और लक्ष्मण गिरी को ऐतिहासिक मतों से जिताकर सरपंच बनाया | उनके शायराना अंदाज से भी गाँव के लोग वाकिफ है, ग्रामीण बताते है कि सरपंच श्री गिरी सुबह होते ही साइकिल पर सवार होकर लोगों की सेवा करने के लिए निकल पड़ते है, और उनका सेवा का यह सफ़र शाम होने के बाद भी चलता रहता है | सरपंच गिरी की माली हालत भी कुछ खास नहीं है, इसके बावजूद वे अपने जीवन से हार नहीं माने और निरंतर गाँव के लोगों की सेवा करते रहे | सिनौधा निवासी शकुन देवी सिंघारे ने बताया कि किसी का पत्र हो, आधार कार्ड या पासबुक में एंट्री या गाँव का कोई पुरुष-महिला कोई भी काम बताये उसे भी निस्वार्थ रूप से उनका कार्य करते है | वंही गीता गोस्वामी ने बताया कि सरकार की तरफ से चलने वाली योजनाओं की जानकारी भी घर–घर पहुँचाने की इसकी पुरानी पहचान है | पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष महेश अग्रवाल ने कहा कि बहुत दिनों बाद मीडिया ने एक अच्छे और सच्चे इंसान के बारे में लिखा जा रहा है | वंही पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोती हिंदुजा ने बताया कि वो तो बाबा बैरागी है, वह आज भी अपनी टूटी-फूटी साइकिल में अपने गृहग्राम सिनोधा से तिल्दा पूजा के लिए निशुल्क निस्वार्थ कम से कम बीस घरो में फूल पहुचाता है | दो पंचवर्षीय पंच रहने के बावजूद सरपंच लक्ष्मण गिरी अपने लिए घर या मोटर साइकिल तो दूर अपने लिए साइकिल खरीद नहीं पाया | आज भी उसके बच्चे तिल्दा दूसरे के घरों में काम करने आते है | कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है सरपंच लक्ष्मण गिरी जैसे लोग विरले ही होते है जो हर पल लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते है |

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