जिन जिलों में लक्ष्य से कम धान की खरीदी हुई है वहां से वंचित पंजीकृत किसानों को धान बेचने का एक मौका दे सरकार

छत्तीसगढ़

By। अविनाश वाधवा


किसान मजदूर संघर्ष समिति की बैठक में किसानों पर बल प्रयोग की कड़ी निंदा


तिल्दा नेवरा। धान की सरकार खरीदी समय सीमा समाप्त होने के बाद हुई किसान मजदूर संघर्ष समिति की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में धान खरीदी की स्थिति की समीक्षा की गई और इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि सोसाइटी में लिमिट निर्धारित करने रकबा घटाने मौसम की प्रतिकूलता सहित अन्य कारणों से धान की सरकारी खरीद ही प्रभावित हुआ है और हजारों की संख्या में पंजीकृत किसान धान बेचने से वंचित रह गए हैं । राज्य में निर्धारित लक्ष्य से लगभग तीन लाख टन कम खरीदी हुई है संगठन ने जिन जिलों में निर्धारित लक्ष्य से कम खरीदी हुई है उन जिलों के धान बेचने से वंचित किसानों को कम से कम एक मौका देने की मांग की है। राज्य में धान बेचने के लिए 19.5 लाख पंजीकृत किसानों में 1 लाख किसानों ने सरकार को ध्यान नहीं बेचा है, सरकार को इन किसानों की पड़ताल करनी चाहिए कि किन कारणों से सरकार को धान नहीं बेचा। बैठक में धान खरीदने की मांग करने वाले कांकेर जिला सहित अन्य स्थानों पर बल प्रयोग करने की कड़ी निंदा की। समिति के सदस्यों ने कहा कि कई परिस्थितियों में अनेक छोटे किसान सोसाइटी में धान नहीं बेच पाते और कोचियों को धान बेचने के लिए मजबूर होते हैं ,सरकार की सख्ती और धरपकड़ के कारण ऐसे मजबूर किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। सरकार को कोचियों

के खिलाफ सख्ती करने की वजह राज्य की सीमा पर और खरीदी केंद्र में सख्ती करना चाहिए। बैठक में प्रतिकूल मौसम के कारण रवि और उद्यानिकी फसलों को हुई क्षति का अब तक सर्वे नहीं करने के लिए शासन प्रशासन को आड़े हाथ लेते हुए तत्काल सर्वे करके प्रभावित फसल और किसानों की सूची बनाने का काम शुरू करने और प्राकृतिक आपदा के कारण हुई क्षति के लिए आरबीसी 6-4 के प्रावधान के अनुसार राहत राशि प्रदान करने की मांग की गई है। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किए गए संशोधन पर चर्चा की गई और योजना को एक किए जाने का किसानों के हित पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार विमर्श किया गया। संगठन इस बात से आशंकित है कि योजना इच्छुक होने के कारण बीमित किसानों की संख्या अत्यंत कम हो जाएगी जिसके कारण बीमा करने वाले किसानों पर बीमा प्रीमियम का भार बढ़ने की संभावना है इसके अलावा बीमा नहीं करने वाले किसान जोखिम से सुरक्षा से वंचित रह जाएंगे, सरकार की या नैतिक और वैधानिक दायित्व है यह प्राकृतिक आपदा के कारण जोखिम से किसानों को सुरक्षा प्रदान करें। संगठन ने सरकार से प्रधानमंत्री फसल बीमा में इस प्रकाश वर्णन करने की मांग की है कि ऋण और अऋण सभी किसान शत प्रतिशत किसानों को भार मुक्त बीमा योजना की सुरक्षा छतरी के दायरे में शामिल किया जा सके।

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