तिल्दा में बंदरों के धमाचौकड़ी से लोगों परेशान…

छत्तीसगढ़

by।अविनाश वाधवा


तिल्दा-नेवरा। नगर एवं ग्रामीण अंचल सहित तिल्दा-नेवरा के रेल्वे स्टेशन में बंदरों का झुण्ड अनायास ही देखने को मिल ही जाता है। यहां दर्जनों की संख्या में बंदर चहलकदमी करते हुए नजर आते हैं जो यात्रियों और खास करके बच्चों के लिए कौतुहल का विषय बन जाता है। प्राय: देखा जा रहा है कि नगर एवं ग्रामीण परिक्षेत्र में आने वाले बंदरों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस तरह से बंदरों को नगर एवं ग्रामीण इलाकों में प्रवेश किया जाना कटते पेड़ों को भी माना जा सकता है क्योंकि जंगलों में पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। वैसे तो राज्य शासन एवं अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कटते पेड़ चिंता का विषय बनता जा रहा है। नगरवासी एवं ग्रामीण अंचल में रहने वाले लोग बताते है कि बंदरों का झुण्ड दिन में एक बार तो देखने को अवश्य मिल ही जाता है। ये लोग बताते हैं कि बंदरों का झुण्ड शहरी क्षेत्र के मकानों के छतों में तथा ग्रामीण अंचल के बने मकानों खास करके कच्चे मकानों के छत में धमाचौकड़ी मचाते है जिससे ग्रामीणों को काफी नुकसान हो जाता है। इसके अलावा इनकी चहलकदमी से फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसके साथ ही ये बंदर बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहते हैं क्योंकि बच्चे इन्हे देखकर काफी खुश होते हैं। लेकिन कई बार बंदरों का ये झुण्ड नगरवासियों एवं ग्रामीणों के लिए परेशानी का भी सबब बन जाता है कि क्योंकि इनकी धमाचौकड़ी से काफी नुकसान हो जाता है जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल सा हो जाता है। बहरहाल हम लोग इतना तो कह ही सकते है। कटते पेड़ों के कारण ही बंदरों का ये झुण्ड ग्रामीण एवं शहर के लिए रूख करता है। जबकि होना तो ये चाहिये कि इन बंदरों के बेहतर जीवन व्यापन के लिए अंचल के बाहरी क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण किया जाना चाहिये। इसके साथ समीपस्थ जंगल में तेजी से कटते पेड़ों को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास होना चाहिये।

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