आदि धर्म जागृति संस्थान का वार्षिक उत्सव, छत्तीसगढिय़ा संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर दिया गया बल

छत्तीसगढ़


बिखरी रंगारंग छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की छंटा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की संस्कृति यहां के लोगों में रची-बसी हैं, आवश्यकता है तो इसके संरक्षण और संवर्धन की। यहां के लोकगीत, संगीत हमारे दिलों दिमाग में बसा हुआ है, यहां के तीज त्यौहार, संस्कृति, खानपान का अपना एक अलग ही महत्व है। उक्त बातें पंडित रविशंकर विवि के कुलपति डॉ. केशरीलाल वर्मा ने मुख्य अतिथि की आसंदी से कही। वे राजधानी के सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में आयोजित आदि धर्म जागृति संस्थान के वार्षिक उत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा द्वारा रचित छत्तीसगढ़ी गीत अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार…को राज्य गीत घोषित किये जाने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना करते हुए इसे आत्मसम्मान प्रदान करने वाला कदम बताया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती छत्तीसगढिय़ा संस्कृति को बचाये रखने, एवं इसके संवर्धन एवं संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी दाऊ सुरेन्द्र कश्यप ने की। इस अवसर पर डॉ. शारदा कश्यप, चार्टर्ड एकाउंटेंट विष्णु बघेल एवं इंजी. पुरन सिंह बैस विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. सुखदेव राम साहू, ठा. कोमल सिंह मरई, व्ही.पी. चंद्रा एवं टेसूलाल धुरंधर रहे। इस अवसर पर सुरेश ठाकुर, अनुसुईया साहू, अरुणा मिरी, नागेश्वर कश्यप एवं लक्ष्मी करियारे अपने साथियों के साथ छत्तीसगढ़ी लोकभजन, लोकगीत एवं लोकनृत्य झांकी की प्रस्तुति दी, साथ ही संस्थान से संबंधित कविगण छत्तीसगढ़ी काव्यपाठ से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान किया। इसके अलावा दो नन्ही बालिका परिधि टिकरिहा ने कविता पाठ (7 वर्ष) एवं प्रनिति टिकरिहा (4 वर्ष) ने नृत्य प्रस्तुत किया जिससे दर्शकगण मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतिभाओं को अंचल के सुप्रसिद्ध कवि रहे स्व. शिवकुमार यदु शिकुम की स्मृति में मैडल एवं आदि धर्म जागृति संस्थान की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाने वालों को थरहा सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सुशील भोले, रामशरण कश्यप, ललित टिकरिहा, कृष्ण कुमार वर्मा, सत्यभामा ध्रुव, मुकेश टिकरिहा, केदारनाथ साहू, नागेश्वर कश्यप, हीरालाल साहू, इंद्रदेव यदु सहित बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ी अस्मिता प्रेमी उपस्थित थे।

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