गुनरस पिया फाउंडेशन के होली मिलन में फाग गीत गुंजा

छत्तीसगढ़

रायपुर। रंग पंचमी के अवसर पर गुनरस पिया फाउंडेशन के सदस्यों ने पारम्परिक होरी, फाग, धमार आदि गाकर, परस्पर गुलाल आदि लगाकर होली मिलन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ख्यातिप्राप्त सहित्यकार व कवि श्री रामेश्वर शर्मा,वरिष्ठ तबला वादक श्री रामकुमार उपाध्याय,हिंदी साहित्य मंडल के सचिव श्री तेजपाल सोनी ने पंडित गुणवंत माधवलाल व्यास जी के छाया चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और गुुलाल लगाकर किया। इस मौके पर पारम्परिक होली ,गीत, ग़ज़ल, ठुमरी, दादरा आदि की प्रस्तुतियां हुईं। नीलिमा मिश्रा ने -सारी डार गई मोहे रंग, तेजपाल सोनी ने -मेरे मन की गंगा, आलोक त्रिवेदी ने -रँगी सारी गुलाबी चुनरिया, दीपक व्यास ने- रंग भरी,राग भरी, नीता डूमरे ने-होरी खेलन पधारो श्री बृन्दावन में, रचना चांडक ने-ढीठ लंगर खेलो ना ,होरी, शुभ्रा ठाकुर ने-रंगीला फागुन आयो, रुद्रनील कुंडू ने-कहीं दूर जब दिन, निर्झर चांडक ने-खेलो न हम संग होरी, श्रीवल्ली ने होरी-मोपे डारो ना रंग, गार्गी काले ने-होरी, अंखियां न डारो जी गुलाल,प्रज्ञा त्रिवेदी ने-मोहे रंग दो लाल, गोपा सान्याल ने-इश्क की चिंगारियों, पवन चावला ने-प्यार भरे दो शर्मीले नैन, बसन्त सोनी ने-हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, प्रदीप चौबे ने हवेली सँगीत-होली खेलन दे, प्रज्योत देवास्कर ने- रंग दे चुनरिया, नरेंद्र दुग्गड़ ने-नफ़रत की दुनियां को छोड़कर, युक्ता झा ने-नैन झुक जाएं प्रस्तुत किया। दो सुरीली प्रस्तुतियाँ वादन की भी हुई जिसमें मनीषा त्रिवेदी ने सितारवादन में-राग काफी में होरी प्रस्तुत किया, और कृष्ण सोनी ने बाँसुरी पर- एक प्यार का नगमा है, बजा कर समा बांध दिया।

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