करोना पर ✍…डा० गीता शर्मा की कविता

छत्तीसगढ़

रायपुर। राजधानी की डा० गीता शर्मा ने कोरोना वायरस पर कविता लिखी है। वह शिवमहापुराण छतीसगढी की अनुवादिका है। इस कवित्री ने अपनी कविता के जरिये क रोना से जंग छेड़ी है। फिलहाल आप पढ़े पूरी कविता।

विकराल बन आया तू,
प्रलय मचाने आया तू,
अशांत तू, विभत्स तू,
विदेह तू, घृणित तू,
प्रलय मचाने आया क्यूंँ तू..?
न प्रज्जर्वलित जोत हुई,
न नवरात्रि जागृत हुई,
धगद धगद जलेगा तू,
भटक भटक मरेगा तू,
प्रलय मचाने आया क्यूंँ तू..?
प्रचंड कुचक्र कटे तेरा,
जब होगा सर्वनाश तेरा,
डमड डमड नाद सुन,
धमक धमक आवाज सुन,
प्रलय मचाने आया क्यूंँ तू..?
पाश बांध गजान्तक,
हव्य कर मरान्तक,
प्रस्थान कर प्रस्थान कर
भूत भूत विदेह तू
प्रलय मचाने आया क्यूंँ तू..?
सतर्क रह , सचेत रह,
विश्राम कर,शुद्ध रह,
स्पर्श न हो,शपथ कर,
हस्त को प्रक्षालकर,
रक्तबीज को नाशकर,
बूंँद न गिरे मुखबिंद का,
छोड दे कुसंग का,
काट दे कुचक्र का,
प्रयास कर,प्रयासकर,
बचाले निज कुटुंब को
जोड़के द्वे हस्त को ,
प्रस्थान का आदेश कर,
भूत भूत विदेह तू,
प्रस्थान कर ,प्रस्थान कर…..

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