काम वाली बाई के मानदेय पर कटौती

छत्तीसगढ़

रायपुर। शहर में घरेलू काम करने वाली कई महिलाएं है। जिनकी रोजी रोटी दूसरों के घरों में काम करने से चलती है। यह घर पर सुबह और शाम दो वक्त काम करने के लिये आती है। कोरोना वायरस लॉक डाउन के दौरान काम वाली बाईयो की छुट्टी हो गई । कुछ को काम से निकाल दिया गया। और जिनको नही निकाला गया उनके मानदेय में कटौती हो रही। लष्मी यादव ने बताया वह काफी सालों से घरेलू कार्य कर रहीं। कोरोना वायरस, लॉक डाउन से हम घर पर है। मेडम को हमने काम पर न आने की जानकारी दे दी । परिस्थिति को देखकर उन्होंने भी छुट्टी दी है। वह तीन घरों में काम करती है। जिसमें से 2 मानदेय में कटौती की कोई बात नही करी है। जबकि एक ने साफ तौर पर कहा है ,जब काम करोगी तभी मानदेय मिलेगा। लॉक डाउन के बीच का पैसा हम नही दे सकते। उन्होंने बताया कि उनके खर्च पर ही उनका घर चलता है। वह रायपुर के कुशालपुर में किराए के घर पर रहतीं है। बड़ा बेटा मिर्गी का शिकार है। उसको दौरा आते रहता पिछले दिनों वह काफी सीरियस था।

स्वालंबी

अक्सर फिल्मी अंदाज में काम वाली बाईयो पर गुस्सा देखने को भी मिलता है। हुक्म फरमाते है ,चाय लाना अभी तक घर की झाड़ू नही लगी ,पोछा,अरे कपड़े नही धुले। सब के सब काम चोर, यह असल जीवन में होता है। लॉक डाउन में यह सब भूलकर स्वालंबी बन रहें। कई ऐसे लोग भी होंगे जिन्होंने कभी काम न किया हो। इसी बहाने उन्हें काम करने,सीखने का अवसर मिलेगा।

मान देय पर कटौती न करें

घर पर काम करने वाले काम वाली बाई से लेकर रामु काका यानी सभी को परिवार का सदस्य माने । यह मालिक पर निर्भर रहते है। वह आपके सुख दुख का हिस्सा है। आप उनको पैसे दे रहे उसके बदले में वह आपकी सेवा कर रहे। आपने भले काम के अनुभव पर मानदेय तय किया हो । पर लॉक डाउन की स्थिति में उनके मान देय पर कटौती न करें। इसकी भरपाई आप बीच ,बीच में पैसे कटौती कर करें। क्योंकि आपका जरा सा सहयोग उसके परिवार को भूखे सोने नही देगा।

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