हनुमान जन्मोंत्सव : डा० गीता शर्मा की कलम✍️ से…

छत्तीसगढ़

रायपुर ।आज हनुमान जी के जनमदिन ए। शिवमहापुराण जईसन बड़का संस्कृत ग्रंथ के घलो हमर छत्तीसगढ़ी भाषा म अनुवाद करैय्या सुंदर नगर रायपुर के रहवासी डा० गीता शर्मा ह हनुमान जी के लेख ला छत्तीसगढ़ी भाखा मा लिखिस। सबो झन ला बतावत चलत हन कि कई ठन राज्य ले ईनाम पवैय्या गीता दीदी के नाम हर छत्तीसगढ़ी भाखा म अब्बड़ कुन ग्रंथ लिखे के सेतिर गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मा घलो ओही दिन जोड़े गहे जेन दिना ओहर अपन शिवमहापुराण ला महामहिम राज्यपाल अनुसुइया उइके ला सौंपिस। आवा पढ़िन ओकरे भाखा म लिखाए हनुमानजी के लेख —
हनुमान जयंती साल म दू तिथि म मनाए जाथे,पहिली चइत के अंजोरी पाख म ,अउ दुसर देवारी म नरक चउदस के दिन,फेर महारिसी वालमिकी ले रचे रमायन के मुताबिक़ बजरंग बली के जनम ह कारतिक मास के अंधियारी पाख के चतुरदसी म मंगलवार के दिन ,स्वाति नछत्र ,मेष लगन म होए रहिस| त ऐहि तिथि ल जनम दिवस के रुप म अउ दूसर तिथि ल विजय अभिनंदन के रूप म बड़का तिहार कस मनाए जाथे।


जनमदिन के दू ठीन कहनी हे


समुद्रमंथन के समे भगवान बिसनु ह मोहिनी रूप धरे रहिन,त उहि रूप ल फेर धरे के इच्छा देवाधिदेव महादेव ह करिन। महादेव के इच्छा ल रखत ,भगवान बिसनु जी ह उहि मोहिनी भेख ल धरके महादेव ल दिखाइन, महादेव मोहिनी भेख ल देखके मोहा गइन, अउ उनकर वीर्य ह खाले म गिर गइस, त पवन देव ह महादेव के वीर्य ल भूइयां म गिरे के पहिली ,वानर राज गोसाइन माता अंजनी के कोख म भितरा दिहिन। ए ढंग ले महतारी के कोख ले बानर रूप म हनुमान जी ह जनमिन। जनमतेज हनुमान जी अब्बड भुखा गइन, त फेर सुरुज नरायन ल बड़का फल समझ के उहि ल खा लिहिन। दूसर कहनी हे, देवारी म घलो हनुमान जयंती मनाथे, एखर दूसर कारन हे, लोक कहनी मुताबिक ए दिन महतारी सीता मइया ह ,हनुमान के भगती अउ ओखर समरपन भाव सेति,उनला अजर -अमर के बरदान देहे रहिन,त एहू सेति घलो जनमदिन नरक चउदस दिन मनाथे। पवनपुत्र हनुमान जी ल शिवजी के ग्यारवां ओंतार माने गे हे। शास्त्र मुताबिक बिहनचे आरुग ओन्हा पहिरके ,हनुमान जी ल आरूग जनेऊ, धजा, लंगोट ,चमेली तेल अउ सिंदूर चघाए जाथे, कहे गे हे, राम के लम्मा उमर हो, एखर बर हनुमान जी अपन देह म सिंदूर ल चुपर ले रहिन।संझा बेरा म दछिन मुखी हनुमान के आगू म रामचरितमानस अउ हनुमान चालिसा , बजरंग बाण के पाठ पढे ले, जम्मो बइरी के नास हो जाथे, अउ हनुमान जी ओखर कलियान घलो करथे।

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