बिरगांव एवं कबीरनगर में पीलिया के एक-एक नये केस मिले

छत्तीसगढ़

पीलिया का फैलाव ना हो, इसको लेकर विभाग अलर्ट

रायपुर । रायपुर शहर के नये इलाकों में पीलिया का फैलाव ना हो इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा माईकिंग के माध्यम से लोगों को खान-पान में विशेष सावधानी बरतने तथा पानी को उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है। कबीर नगर और बीरगांव में पीलिया के एक-एक नये मरीज मिलने के बाद विभाग द्वारा इन इलाकों में लगातार डोर-टू-डोर संपर्क किए जाने के साथ ही पीलिया से बचाव के बारे में जानकारी भी दी जा रही है। पीलिया प्रभावित मोहल्लों में लगातार परीक्षण सत्र का आयोजन कर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर ब्लड सैंपल भी लिया जा रहा है। ज्ञात रहे कि रायपुर शहर में पीलिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए कुल 17 काम्बेट टीम गठित की गई है। इस टीम में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक सहित लैब टेक्निशियन एवं मैदानी अमलों को शामिल किया गया है।

डॉ. सुभाष पाण्डेय ने बताया कि बीरगांव एवं कबीरनगर में पीलिया के एक-एक नये केस मिले हैं, जिन्हें उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। पीलिया का सर्वाधिक संक्रमण कबीरनगर इलाके में हैं। यहां विभाग द्वारा संक्रमण की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि दूषित पानी की सेवन की वजह से रायपुर शहर के विभिन्न मुहल्लों एवं वार्डों में अब तक 588 लोग पीलिया से प्रभावित मिले हैं। 145 लोगों को जिला हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, जिसमें से अब तक 63 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। शेष मरीजों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि पीलिया पीड़ितों में से 8 गर्भवती माताएं हैं, जिन्हें प्रसूति हॉस्पिटल कालीबाड़ी में भर्ती कराया गया है। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि विभाग द्वारा लोगों को पीलिया के लक्षण के बारे में भी बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ठण्ड के साथ बुखार, भूख कम लगना, कमजोरी, पेशाब का पीला होना, उल्टी तथा हाथ, पैर में दर्द पीलिया के प्रारंभिक लक्षण हैं। इस तरह का लक्षण महसूस होते ही लोगों को अपने समीप के शहरी स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य परीक्षण कराने की समझाईश दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय में पीलिया के इलाज का बेहतर प्रबंध है। पीलिया पीड़ितों को झाड़-फूंक एवं नीम हकीम के चक्कर में न पड़कर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य परीक्षण एवं निःशुल्क इलाज कराने की समझाईश दी जा रही है।

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