श्री हरि अवतार -भगवान परशुराम

छत्तीसगढ़ धर्म


हिंदू धर्म ग्रंथों में अष्ट चिरंजीवी का वर्णन है, इनमें से एक भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी है-
अश्वत्थामा बलीर्व्यासो हनुमांश्च विभीषण:
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविन:
मार्कंडेय महाराज जी अष्टम चिरंजीव के रूप में विद्यमान हैं।

विष्णु अवतारी, भगवान परशुराम जी परम चिरंजीवी हैं। उन्हें अमरत्व का वरदान है और आज भी भगवान परशुराम कहीं तपस्या में लीन हैं।

भगवान परशुराम जी का प्राकट्य अक्षय तृतीया के दिन हुआ था इस संबंध में मान्यता है कि पूरे वर्ष में कोई भी तिथि क्षय हो सकती है लेकिन वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया का कभी क्षय नहीं होता।इस कारण से इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। इसे सौभाग्य सिद्धि भी कहते हैं ।
अक्षय तृतीया के दिन अवतरण होने के कारण भगवान परशुराम की शक्ति, साहस, बल, ओज कभी क्षय नहीं हो सकता।
भगवान परशुराम ब्राह्मण कुल में जन्म लिए थे।ऋषि जमदग्नि और रेणुका भगवान परशुराम के माता पिता थे।अक्षय तृतीया को जन्म लेने के कारण भगवान परशुराम की शास्त्र संपदा भी अनंत हैं । भगवान परशुराम दरअसल परशु के रूप में शस्त्र और राम के रूप में शास्त्र का प्रतीक है।शास्त्र मत से भगवान परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं किंतु परशु में भगवान शिव समाहित हैं और राम में भगवान विष्णु इसलिए परशुराम भगवान ‘शिव हरि’ हैं।

महान पराक्रम के प्रतीक भगवान परशुराम तेजस्वी, ओजस्वी, वर्चस्वी, यशस्वी एवं माता पिता की भक्ति भाव से परिपूर्ण हैं।
शास्त्र मत है कि भगवान परशुराम ने जहां पिता की आज्ञा से माता जी का गला काट दिया वही पिताजी से माता को दोबारा जीवित करने का वरदान भी मांग लिया था।भगवान परशुराम महान प्रतापी देव हैं ।
ब्रह्मा वैवर्त पुराण के अनुसार एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन हेतु कैलाश पर्वत पहुंचे लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें अपने पिता शिवजी से मिलने नहीं दिया। इस बात से भगवान परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर अपने फरसे से भगवान गणेश जी के ऊपर प्रहार कर दिया था तब भगवान गणेश जी का एक दांत टूट गया था। तभी से गणेश जी को एक दंत कहा जाता हैं।

भगवान परशुराम की महिमा अनंत एवं अपार है शस्त्र धारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों के सीमा में संभव नहीं हैं।
आज अक्षय तृतीया के महान पर्व में हम सभी विप्रकुल गौरव, विप्रों के महादेव,भगवान परशुराम को कोटि कोटि प्रणाम करते हैं। शास्त्र मान्यता है कि जो मनुष्य आज के दिन पूरे भक्ति भाव व श्रद्धा से भगवान परशुराम जी के मूर्ति के सामने पूजा-पाठ नमन करते हैं वे अक्षय पूर्ण फल प्राप्त करते हैं और अगले जन्म में राजा के रूप में जन्म लेने की पूरी संभावना होती है। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर अभीष्ट सिद्धि एवं मनोरथ पूर्ण करने हेतु हमें इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
ओम जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो: परशुराम: प्रचोदयात् ।

आप सभी को अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जी के पावन प्राकट्य दिवस पर अनवरत बधाई एवं शाश्वत मंगल कामनाएं प्रतिश्रुत हो।

रविंद्र कुमार द्विवेदी चांपा

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