परशु राम जयंती पर विशेष डॉ.गीता शर्मा की कलम

छत्तीसगढ़ धर्म

भगवान परसुराम नांव वइसन गुन |परसु माने पराकरमी अउ राम माने सिरतोन सत त परसुराम के अरथ होइस, बडका पराकरमी अउ सच ल धरइया|इन ला बिसनु जी के छठा ओंतार माने गे हे|
परसुराम के ददा जमदगनी अउ महतारी रेनुका रहिन|अपन पाचवा लइका के नांव ल” राम “रखे रहिन फेर तप के बल म भगवान शिव ल खुस करके ,शिवजी के दिव्य अस्त्र फरसा / कुठार ल पाईंन ,तेखर सेति उनकर नांव परसुराम पर गे|माने “परसु पाइन शिव ले”|शिव ह संहार के देवता आय, परसु ह संहारक होथे,काबर परसु ह शस्त्र आय,राम ह प्रतीक हे बिसनु के|
जनमदिन
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आखा तीज (अक्षय तृतीया)के दिन इनकर जनम होए रहिस,तेखर सेति परसुराम के शस्त्र सकती अक्षय माने जाथे|
सिक्छा
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महतारी रेनुका ह आसरम म परसुराम ल सीखौना देवय, प्रकृति के सांत चित गोद म समे ह बीतिस, जिनावर अउ पंछी मेर परसुराम बडका दुलार करे, अउ उनकर संघरे उन ह जिनावर अउ पछी के बोली ल घलो सीख डालिन, कतकोन मनखइया जिनावर ल संगवारी बना लेवय|
समे म उन ह बिस्वामित्र अउ महरिसी रिचीक के आसरम म रहिके, सिक्छा ल पाईंन, महरिसी रिचीक ह ,परसुराम के चिभिक ल देखके अपन सारंग नांव के दिव्य धनुष ल,महरिसी कसयप जी ह वैष्णवी मंत्र देहे रहिन|परसुराम शिव जी बड़का भगत रहिन,शिव जी ल खुस करके विदुयदंभिनांव के परसु ल पाए रहिन, तेखर सेति उनकर नांव रामभदॖ ले परसुराम होइस|
शस्त्र बिद्या म अगूवा रहिन,वैदिक संस्कृति ल हिरदे ले माने,तेखर सेति उन ह बाहमन होवत शस्त्र ल धरिन,अउ छत्रिय असन बेवहार करिन|कौरव के कुलगुरु आचार्य दॖोण ,पितामह भिष्म अउ अंगराज कर्ण उनकर शिष्य रहिन |
परसुराम माईलोगन के बड़का सनमान करें|अत्रि के गोसाइन अनुसूया अउ अगस्त्य के गोसाइन लोपमुदॖा के संग माई लोगन लजगाए के उदीम ल करिन, महाभारत काल म गंगापुत्र भीस्म ह काशी के राजा के नोनी अंबा ल हरन करिन त ओखर सनमान बर परसुराम भिस्म मेर जब्बर जुद्ध करिन|
त्रेता जुग म सीता स्वयंवर समे म श्रीराम ह शिवजी के धनुष ल तोडि़न त ओकर गरजन के सोर पूरा बरमहांड म बगरगे, त परसुराम बगियावत लछिमन मेर भिड़ गइन, पाछु जब उनला आरो लगिस की धनुष ल राम जी ह तोडे़ रहिन त थोरहे उनकर रिस ह थिराइस|
परसुराम गउमाता के बड़का सेवक रहिन| महिस्मति के हैहयवंसी राजा कार्त वीर्याजुन ह बड़का दूभ्भर तप करके दत्तात्रेय ल खुस करके एक हजारन भुजा के बल अउ काकरो मेर नइ हारे के वर ल पाइस, त ओखर नांव सहस्त्रबाहू परिस, अब ये ह गरब म मताए जमदगनी के आसरम म देवराज इन्दॖ मेर ले पाए कपिला कामधेनु ल हरन कर लिहिस, त ततकेच आरो ल पातेच परसुराम मारे रिस म बगियावत सहस्त्रबाहू ल हूंदेरत ,मारत कपिला कामधेनु ल सनमान समेत लहुटा लाइन|
परसुराम दानवीर घलो रहिन|हैहयबंसी राजा ल हरोए सेति अस्वमेघ जग्य करिन त जम्मौ भूइयां ल दान कर दिहिन, तहां पाछू अपन अस्त्र शस्त्र ल घलो तियाग के महेन्दॖ पहार म आसरम बनाके रहे लगिन|लोक कहनी मुताबिक आज घलो परसुलाम अपन दिव्य सकती ले ओ पहार म रहिथे|
ददा जमदगनी के कहे ले , अपन महतारी के कर दिहिन| सुने म जम्मो अचकचा जाथे फेर एखर मूल म जउन रहस लुकाए रहिस ,ओ सच ल कोनो जाने के उदीम ल नइ करय|ए सुवाल के जुवाब हमन ल परसुराम के राम म मिलथे|राम माने नैतिक सच माने सात्विक सत्ता| परसुराम ह राम के सत ओंतार रहिन,नेतिक संसकार के ओंतार, इनकर तेज ओज ले ,अराजकता ल नास करके ,नैतिक अउ नियाय के धजा ल फहराइन|

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