कहाँ-कहाँ किसने की भूल
करो न ऎसी बात फिजूल

बढ़े चलो घबराना मत
लगते हैं पथ में कुछ शूल

काँटों से मित्रता करें
चलो, बना लें उनको‌फूल

चलती‌ है विपरीत हवा
कर लो तुम उसको अनुकूल

यह जीवन तो है सरिता
ढैँढ़ो कहाँ, किधर है‌ कूल


डॉ.गीता शर्मा रायपुर

NEWS27_REPORTER

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