जान हैं तो जहान हैं…

छत्तीसगढ़

जान हैं तो जहान हैं ।
मान और सम्मान हैं ।।

  1. सब काम-धंधे में मंदी हैं ।
    हम सब घर में बन्दी हैं ।।
    फिर भी न हमकों,
    काम में जाने की जल्दी हैं ।
    भले सब डूबे तो डूबे,
    पर उससे भी किमती,
    ये हमारा जिंदगी हैं ।।

जान हैं तो जहान हैं ।
मान और सम्मान हैं ।।

  1. किसी से मिलना न जरूरी हैं ।
    मिलने से फैलता महामारी हैं ।।
    और जीना है,जिंदगी अभी अधूरी हैं ।
    दिल में हम एक दूजे के करीब हैं,
    यार हमारे जिस्म में बस दूरी हैं ।।

जान हैं तो जहान हैं ।
मान और सम्मान हैं ।।

  1. तू भी जिए, मैं भी जियूँ,
    चलों हम करते हैं वादा ।
    दर्दे-गम तू भी पीए, मैं भी पीऊँ,
    एक रोटी को खायेंगे, आधा-आधा ।।
    हमको खुशियाँ न मिले, भले ज्यादा ।
    चलों कुछ दिन जीते हैं, जिदंगी सादा ।।

जान हैं तो जहान हैं ।
मान और सम्मान हैं ।।

कवित्री, उर्मिला बतौली, शांति पारा, जिला सरगुजा

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