परिवार का बोझा उठाकर, चरण बस से चलेंगे मजदूर…

छत्तीसगढ़

By।अविनाश वाधवा

तिल्दा नेवरा। वैश्विक महामारी कॅरोना के चलते लॉक डाउन में छत्तीसगढ़ के कई मजदूर देश के विभिन्न शहरों में फंसे हुए है । सरकार की तरफ से उनकी वापसी का इंतजाम न होता देखकर, मजदूर खुद अपने साधन से ही जैसे तैसे वापसी कर रहे है।कई मजदूर पैदल ही वापस आ रहे है।उनके पास उनका समान होता है, पूरा परिवार बोझ उठाकर पैदल ही वापस आ रहे है।मई माह के इस तपती गर्मी तरह 400-500 किलोमीटर की दूरी तय करना बहुत की कष्टदयाक है, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए, और पैदल चलते चलते वे थककर कही भी सो जाते है, इसका परिणाम औरंगाबाद में मजदूर मालगाड़ी की चपेट में आकर मौत के मुंह मे समा गए।किसान नेता व जिला पंचायत सभापति ने इनकी अकाल मृत्यु पर गहरा दुःख प्रकट किया है, और श्रद्धांजलि अर्पित किया।

मजदूरों की पैदल वापसी रोके

मजदूरों की वापसी का कोई ठोस इंतजाम होना चाहिए। वे राज्य जिलों की सीमा पार करके आ रहे है, लेकिन प्रशासन की तरफ से उनको कोई पूछने वाला नही है, ये कैसी विडंबना है, इनके लिये सरकार मीडिया के माध्यम से कहती है कि वापसी का इंतजाम किया गया है, तो फिर ये पैदल कैसे वापस आ रहे है। राजू शर्मा ने कहा कि इनकी पैदल वापसी को तत्काल रोक जाए, और इनके वाहनों के माध्यम से तत्काल इनके मूल जगहों पर पहुँचाया जाए।

छत्तीसगढ़ के यह मजदूर फंसे

तरेंगा के लोकेश चक्रधारी, गायत्री चक्रधारी, ग्राम – कोलिहा से राकेश मनहरे संपत्ति बाई मनहरे, ग्राम- बोइरझिटी से मनमोहन निषाद, सुरेखा निषाद, भंवरसिंग निषाद, इसी तरह छत्तीसगढ़ के अन्य गांवों चितावर, कबीरधाम जिले से , तखतपुर से, घुरसेना से , ग्राम- बैजी, घोघट्टी,(बेमेतरा) ग्राम- गोढ़ी, अर्जुनी, भाटापारा से भी मजदूर , बलवाड़ी गाँव, लक्ष्मी माता चौक,नया लेबर केम्प, पार्क ग्लेंडर, जिला- पुणे में फंसे है।

मजदूरों की पैदल आने की चल रही तैयारी

महाराष्ट्र में फंसे छत्तीसगढ़ के 85 मजदूर एक ही जगह में है, ये पैदल आने की तैयारी में है। उनका काम धाम सब बन्द हो चुका है, ऐसी स्थिति में अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है, वैसे ही दीनदयाल कौशल्य विकास योजना में छत्तीसगढ़ से बड़ोदरा गए 35 बालिकाओं को अभी तक किसी भी प्रकार की सहायता नही मिली है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *