राजस्थान में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने संस्कृतिक धरोहर लोकगीत, लोक नृत्य से सभी को किया मंत्र मुग्ध

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ी व्यंजन

रायपुर।सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर राजस्थान में 20 फरवरी को आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण में राज्य के शिक्षकों ने छ्ग की सांस्कृतिक धरोहर,लोकगीत, लोकनृत्य की प्रस्तुति ने देश के अन्य राज्यों के शिक्षको का मन मोह लिया। हमारी सांस्कृतिक विविधता की 10 दिवसीय प्रशिक्षण में रायपुर जिले के तीन शिक्षक सुनिला फ्रेंकलिन शास.प्राथमिक शाला- कचना धरसीवा ,होरीलाल पटेल,शास.पूर्व माध्यमिक विद्यालय- बोरिद आरंग ,अशोक कुमार कोसले शास.उच्चतर माध्य.विद्यालय- कनकी तिल्दा इसके अलावा दुर्ग जिला के शिक्षक लखेश्वर प्रसाद साहू ,शास.प्राथमिक शाला- खम्हरिया पाटन अशोक कुमार साहू शास.प्राथमिक शाला- सगनी धमधा रूमा कमल शास.पूर्व माध्य.विद्यालय-तरीघाट पाटन ने राज्य का

प्रतिनिधित्व किया । शिक्षकों ने सबकी संयुक्त प्रस्तुति से राज्य की लोकगीत ,लोक नृत्य ददरिया, राऊत नाचा, सुआ,पन्थी,करमा,छेरछेरा एवं फाग गीत,नृत्य की प्रस्तुति कर छ्ग की संस्कृति का परिचय कराया। वहीं विभिन्न प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन ठेठरी,खुरमी ,अड़सा,शकरपारा,कटवा को खिलाकरअन्य राज्य के शिक्षकों को स्वाद से अवगत कराया। छत्तीसगढ़ के गहनों का प्रदर्शन तथा बांस से बनाए गए घरेलू

सामग्री सूपा,बिंझना,टुकनी,गेड़ी,पंखा,झाडू ढोलक,खुमरी की उपयोगिता बताया गया। इस प्रशिक्षण में राज्य की प्राकृतिक,सांस्कृतिक,ऐतिहासिक,शैक्षणिक,कृषि,भौगोलिक,महापुरूष ,खनिज सम्पदा की जानकारी दी गई। रायपुर,दुर्ग जिला के शिक्षकों की दमदार प्रस्तुति ने राज्य के सांस्कृतिक परम्पराओ को जीवंत बना दिया।

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