कुम्हारी जलाशय 100 साल पहले 1923 में अंग्रेजों ने बनाया

छत्तीसगढ़

By।अविनाश वाधवा

तिल्दा नेवरा। रायपुर जिला के तिल्दा विकास खंड में 164 करोड़ की योजना, कुम्हारी जलाशय में शिवनाथ खारुन के संगम बेमता एनीकेट से पानी लाने की योजना को किसान नेता व जिला पंचायत के सभापति राजू शर्मा ने मुख्यमंत्री भुपेश बघेल, जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे से कुम्हारी जलाशय में पानी लाने की योजना को तत्काल चालू करने की मांग की है।जल संसाधन विभाग द्वारा 2019 में कुम्हारी जलाशय में खारुन और शिवनाथ के संगम से पानी लाने की योजना बनाई है।राज्य सरकार की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण क्षेत्र के 30 गांवों के किसानों को सिंचाई का लाभ नही मिल पा रहा है, ज्ञात रहे कि राज्य भर में भले ही बारिश औसतन से ज्यादा होता है,।तिल्दा ब्लॉक व सुहेला क्षेत्र में विगत 5 वर्षों से बारिश इतनी कम हो रही है, किसान धान की खेती नही कर पा रहे हैं ।पानी की कमी के कारण पिछले वर्ष भी लगभग 25 गांवों में धान नही हो पाया, क्षेत्र के किसानों को पुर्व राज्य सरकार के कृषि मंत्री द्वारा नवापारा के सभा मे तत्कालीन कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कुम्हारी जलाशय में पानी लाने की घोषणा की थी,।

शिवनाथ नदी से कुम्हारी डेम 105 फूट ऊपर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी शक्लोर की सभा मे कुम्हारी जलाशय में पानी लाने का अस्वासन दिया था। वर्तमान सरकार को एक वर्ष पुर्ण होने के बाद भी, कुम्हारी जलाशय में पानी लाने की योजना चालू नही से किसान निराश व उदास है। ज्ञात रहे कि कुम्हारी जलाशय कृषि के लिये एकमात्र साधन है, या फिर किसान वर्षा पर निर्भर है, कुम्हारी जलाशय 100 साल पहले 1923 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था।, यह डेम कभी भी पूरा नहीं भरा गया है, जलसंसाधन विभाग के माध्यम से 35 किलोमीटर दूर शिवनाथ नदी के पानी को कुम्हारी डेम तक लाने की योजना बनाई है, पहली बार प्रदेश में पानी लिफ्ट कर डेम को भरा जएगा।शिवनाथ नदी से कुम्हारी डेम 105 फूट ऊपर है, यही वजह है कि बारिश के दिनों में शिवनाथ नदी के ओवरफ्लो होने की दशा में, उसके अतिरिक्त पानी के उपयोग की योजना बनाई गई है।जल संसाधन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के सर्वे का काम पूरा कर लिया है, फिलहाल यहाँ 3.56 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) यानी टेंक की क्षमता का एक तिहाई ही पानी है, इसकी कुल क्षमता 11.34 एमसीएम है। उक्त जानकारी जलसंसाधन विभाग महानदी गोदावरी बेसिन के द्वारा दिनाँक 12 अक्टूबर 2019 को समाचार पत्रों में प्रकाशित किया था।

कुम्हारी जलाशय 1000 एकड़ में फैला

इस संबंध में , किसान नेता व जिला पंचायत सभापति ने सिंचाई विभाग से संपर्क करने पर जानकारी दी कि योजना बनाकर राज्य सरकार को दे दी गई है, ज्ञात रहे कि कुम्हारी जलाशय में पानी आने से, इस प्रोजेक्ट के जरिए लगभग 8 एमसीएम पानी कुम्हारी डेम में पहुंच जाएगा, इसके पानी लाने की योजना के क्रियान्वयन होने के बाद , 40 गाँव को 5626 हेक्टेयर इलाको में सिंचाई हो सकती है, यह 1919 में बनना शुरु हुआ था जो कि 1923 में बनकर तैयार हुआ, लेकिन डेम आजतक कभी भी पूरा नही भरा जा सका, शिवनाथ नदी पर स्थित एनीकेट से मोहरेंगा जंगल तक 1500 एमएम की पाइपलाइन 30 किलोमीटर तक बिछाई जाएगी, उसके बाद मोहरेंगा से कुम्हारी जलाशय तक 5 किलोमीटर तक 1000 एम एम की पाईप लाईन होगी, कुम्हारी डेम को भरने के लिए तिल्दा तहसील के बेमता गाँव मे सोमनाथ एनीकेट के पास शिवनाथ नदी में 800 एच पी के 6 वर्टिकल पम्प लगाए जाएंगे।विकल्प के रूप में जिला पंचायत के सभापति राजू शर्मा ने कहा कि, समोदा महानदी से जी एम आर, वर्तमान में अदानी पॉवर प्लांट रायखेड़ा को पानी दिया जा रहा है।उक्त कंपनी का पाईप लाइन, कुम्हारी जलाशय से मात्र 5 किलोमीटर है।उन्होंने ने कहा कि महानदी के पानी मे पहला अधिकार किसानों का है, इसलिए उक्त अदानी प्लांट के पाईप लाइन से भरवाडीह जलाशय, कुम्हारी जलाशय और कठिया जलाशय में भी पानी भरा जा सकता है। कुम्हारी जलाशय 1000 एकड़ में फैला हुआ है, इस डेम को पुरी तरह भरने का असर रायपुर के वाटर लेवल पर भी पड़ेगा, विशेषज्ञों के अनुसार इससे न सिर्फ इस क्षेत्र के लोगो के लिए पानी की समस्या का निवारण होगा, बल्कि पर्यावरण भी बेहतर होगा, कुम्हारी जलाशय का पानी मानपुर जलाशय में आएगा जिससे, कोटा, चापा, मोहगांव, सतभावा, मोहदी, खपरी खुर्द, भैसा, करेली, सुहेला, नवापारा, मटिया, फरहदा, शिकारी केशली, मानपुर तुलसी, सरफोगा, अलदा, टोहड़ा, परसदा, बेहराडीह, पहरी, चंगोरी, इन गांवों को सिंचाई का लाभ मिलेगा, राज्य सरकार से किसान नेता व जिला पंचायत सभापति राजू शर्मा में अनुरोध किया कि किसानों के हित को देखते हुए इस योजना को तत्काल चालू किया जाए।

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