बीड़ी-सिगरेट की कालाबाजारी के कारण व्यापारियों में फुट …

छत्तीसगढ़

व्यापार में राजनीति…

By ।अविनाश वाधवा

तिल्दा नेवरा। तम्बाकू -गुटखा और बीड़ी-सिगरेट की कालाबाजारी के कारण तिल्दा-नेवरा के सबसे बड़े किराना व्यापारी संघ में इन दिनों फूट पड़ गई है।आज हालात यह है कि संघ के व्यापारी एक दूसरे पर खुलकर आरोप लगा रहे हैं।हालांकि नाम किराना व्यापारी संघ का चलता है,लेकिन इसमें अन्य व्यापार से जुड़े लोग भी शामिल हैं।जब से लॉक डाउन शुरू हुआ है, तब से इस संघ में फूट पड़ गई है। 

दरअसल संघ में कुछ ऐसे लोग शामिल हैं, जो किराना व अन्य सामानों के साथ पान-मसाला बीड़ी सिगरेट गुड़ाखू आदि सामान बेचते हैं। लॉक डाउन के चलते बीड़ी सिगरेट तंबाकू गुटखा पान मसालों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद शहर में कुछ ऐसे व्यापारी हैं, जो इन सामानों की तस्करी कर रहे हैं. अधिकारियों से मिलीभगत कर बेरोकटोक प्रतिबंधित वस्तुओं को बेच रहे हैं। इसी बात का विरोध कुछ व्यापारी करने लगे। बताया जाता है कुछ ऐसे  व्यापारी हैं, जो सिर्फ पान मसाला और अन्य सामान बेचते हैं। प्रतिबंध के बाद उन्होंने उस प्रतिबंधित सामान को बेचने के लिए नई चाल चली और किराना आदि सामान लाकर दुकानों में रख दिया। उसके बाद उसी की आड़ में ये लोग प्रतिबंधित वस्तुओं को बेचना शुरू कर दिया। कुछ व्यापारी नेतागिरी का फायदा उठाकर व्यापार में राजनीति ले आए। जिसके बाद से संघ में लोग घुटन महसूस करने लगे। इतना ही नहीं कुछ व्यापारी सीधे-साधे दुकानदारों के खिलाफ शिकायत कर  उन्हें परेशान करने लगे। बाद में अधिकारियों से समझौता कर रहे।

एक भाजपा नेता कर रहा है दलाली :

बताया जाता है कि शहर का एक भाजपा समर्थक जो नगरपालिका में पदाधिकारी है,के द्वारा प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री करने वाले लोगों को छाती ठोक कर कहता रहा कि हमारे वार्ड में यदि कोई गलत कार्य करता है, तो कोई भी कार्यवाही मेरे बगैर नहीं कर सकता है। जबकि उन्हीं के कुछ लोग खुलेआम मसाला, बीड़ी, सिगरेट, गुड़ाखू की तस्करी करते रहे। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को लेकर अनभिज्ञता जाहिर करते रहे, लेकिन शहर में इस बात की चर्चा होती रही। मजेदार बात तो यह है कि शहर में दुकान खोलने, बंद करने के लिए व्यापारियों को एक प्रशासनिक अधिकारी ने इन्हीं से मिलने के लिए कह रखा था। इतना ही नहीं उस प्रशासनिक अधिकारी ने लोगों को आने-जाने के लिए पास जारी करने के लिए भी उन्होंने कुछ कोरे पन्नों पर हस्ताक्षर सील लगाकर दे रखा था। और उक्त नेता प्रचारित करता रहा कि जब भी किसी को बाहर जाना हो तो मुझसे मिले, मैं पास जारी करवा दूंगा। 

बताया जाता है कि 2 दिन पूर्व है एक मेटाडोर में पान मसाला भर कर ले जाया जा रहा था। तभी नगर पालिका के एक पार्षद एवं एक अन्य पदाधिकारी की नजर उस पर पड़ी. जब चालक से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इसमें पान मसाला भरा हुआ है। उसके बाद उक्त पालिका पदाधिकारी के द्वारा व्यापारियों से मिलकर यह प्रचार किए जाने लगा कि पार्षद के द्वारा यह पता लगाया जाता रहता है कि कौन व्यापारी क्या बेच रहा है। यदि इसका विरोध नहीं किया गया, तो व्यापारी अवैध व्यापार नहीं कर पाएंगे। इस बात पर किराना व्यापारी संघ के अध्यक्ष ने सीधा इनकार कर दिया। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दे दी कि यदि जो गलत कार्य करते हुए व्यापारी पकड़ में आएगा, उससे संघ का कोई लेना देना नहीं होगा। उसके बाद कुछ व्यापारी उसके बहकावे में आकर इस्तीफा देने का ऐलान कर दिए। 

अब तक 18 सदस्य छोड़ चुके हैं संघ :

बताया जाता है कि किराने का व्यापारी जो कि प्रतिबंध के बाद भी खुलेआम गुड़ाखू बेच रहा था, उसकी शिकायत किसी व्यक्ति ने पुलिस से कर दी। पुलिस जांच करने उनके यहां पहुंच गई। बाद में उस व्यापारी ने भी पुलिस की कार्यवाही को लेकर संघ में बात की, लेकिन संघ ने इस मामले में हाथ डालने से इनकार कर दिया। उसके बाद उस व्यापारी ने भी संघ से इस्तीफा दे दिया। संघ के अध्यक्ष सुंदरदास पंजवानी ने बताया कि अभी तक 17 सदस्यों के इस्तीफ़े संघ के सचिव के पास आए हैं। संघ के सचिव राजेश लालवानी ने बताया कि जिन 17  व्यापारियों ने इस्तीफे दिए हैं, सभी का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया हैं। 17 लोगों के इस्तीफा देने से संघ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि संघ में सदस्यों की संख्या 130 के आसपास है। उन्होंने कहा कि आज भी सभी व्यापारी एक हैं। कुछ व्यापारी भाइयों के मन नहीं मिल रहे हैं, इसीलिए इस्तीफा दे दिया है, लेकिन सभी व्यापारी एक हैं।

20 प्रकार के व्यापारियों ने बनाया अपना अलग-अलग संघ :

उल्लेखनीय कि लाक डाउन के बाद तिल्दा में पहले फुटवियर, फिर रिटेल कपड़ा व्यापारी संघ, उसके बाद जनरल स्टोर और अब 20 व्यापारी सदस्यों ने अलग संघ बना लिया है। दरअसल लॉक डाउन के दौरान अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में उन्हीं लोगों को आमंत्रित किया जाता था, जो व्यापारी संघ के पदाधिकारी हैं, जो कुछ व्यापारियों को नागवार लग रहा था। उसके बाद तिल्दा में अलग-अलग संघ बनने का सिलसिला शुरू हो गया। फिलहाल तिल्दा में जो व्यापारिक संघ में फूट पड़ी है, उसकी शहर में जमकर चर्चा हो रही है। राजेश लालवानी ने बताया कि संघ के किसी भी पदाधिकारी ने इस्तीफा नहीं दिया है।

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