सुजाता तिवारी के कलम से….

जज्बा


मेरी माँ

मेरी माँ, ये अपने आप मे ही एक ऐसा शब्द है, जिसे बोलने भर से ही या सुनने भर से ही दिल को सुकून मिलता है। इसे शब्दों मे बयां नही कर सकते ये इतना खूबसूरत रिश्ता होता है।इस संसार मे जो हम इसके होने पर इनका कद्र कभी नहीं करते । पर उनको पूछो जो इस शब्द को चाह कर भी नही बोल सकता अगर कोई दूसरे रिश्ते होते तो शायद ही दूसरे मिल जाते पर ये वो रिश्ता है। वो शब्द है… माँ जिनकी कोई तुलना ही नही की जा सकती संसार के किसी भी रिस्तों से ऐसा शब्द है..माँ ऐसी ममता है…माँ !!!!

नोट : प्रकाशित लेख लेखकों द्वारा लिखी गई है इसमें किसी भी प्रकार की 
प्रतिलिप्यधिकार के दावे की स्तिथि में लेखक स्वयं जिम्वेदार होगा |

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