पहले दिल की रज़ा जान जाइये फिर जो निग़ाहे यार कहे मान जाइये

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सुर सृजन , गुनरस पिया फाउंडेशन की फेसबुक पर लाइव शाम ए ग़ज़ल

रायपुर. सुर सृजन ,नामक सुगम संगीत संस्था गुनरस पिया फाउंडेशन की इकाई ने कल फेसबुक पर लाइव शाम ए ग़ज़ल , प्रस्तुत किया।

सुर सृजन के कलाकार दीपक व्यास और प्रज्ञा त्रिवेदी ने कुछ बेहद खूबसूरत ग़ज़लें शाम ए ग़ज़ल में अपने श्रोताओं को सुनाई। सैकड़ों लोगों ने इसे सुनकर दाद दी।
जगजीत चित्रा सिंह की कुछ हिट डुवेट ग़ज़लें जैसे, पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइये फिर जो निग़ाहे यार कहे मान जाइये, मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम।
सोलो ग़ज़लों में दीपक व्यास ने जगजीत सिंह, मेहंदी हसन की ग़ज़लें, रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ प्रस्तुत किया और पण्डित गुणवन्त व्यास द्वारा बनाई गई कुछ कम्पोज़िशन , करम निगाहों ने उनकी ,किया किया, न किया, यादों में एक हसीन सा चेहरा है आज भी, ख़ुदा का ज़िक्र करें या तुम्हारी बात करें प्रस्तुत किया।


प्रज्ञा त्रिवेदी ने चित्रा सिंह की सोलो ग़ज़लों में , आपको भूल जायें हम इतने तो बेवफ़ा नहीं, राधिका चोपड़ा की, बख़ुदा अब तो मुझे कोई तमन्ना ही नहीं , और पण्डित गुणवंत व्यास की कम्पोज़िशन ,मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे, प्रस्तुत किया। सभी ग़ज़लों में शहर के तबलावादक गौरव बिस्वास ने जोरदार संगत की सभी ग़ज़लों का आनन्द श्रोतागण लाइव में लेते रहे। दीपक व्यास ने बताया , चल रही महामारी और सुरक्षा के मद्देनजर अब ऐसी सभाओं का ट्रेंड चल पड़ा है, लोगों को सोशियल मीडिया के माध्यम से जोड़कर अच्छी चीज़ें प्रस्तुत की जा सकती हैं,कुल मिलाकर समय के साथ चलते हुए सँगीत सेवा और साधना ही उद्देश्य है।

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