रक्षाबंधन का शुभ मूहूर्त जानिए, कितने बजे बहने भाइयों को राखी बांधेगी

छत्तीसगढ़

By. शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल:-बहन के स्‍नेह का प्रतीक रक्षाबंधन के त्‍योहार का एक दिन शेष है। ऐसे में राखी किस समय पहनाएं इसकी भाई और बहन दोनों को चिंता रहती है। लेकिन ज्‍योतिषचार्यों और पंडितों की मानें तो अन्‍य सालों के मुकाबले इस बार भद्रा दोपहर की जगह सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर ही खत्‍म हो जाएगी। ऐसे में सुबह नौ बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक विशेष शूभ मूहूर्त है। बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं।
सावन मास के शुक्‍ल पक्ष पूर्णिमा के दिन श्रावणी उपक्रम हिन्दुओ के लिए सबसे बड़ा पर्व है। पंडित ऐमन प्रसाद मिश्रा के अनुसार रक्षाबंधन का प्राचीनकाल से ही मनाने का प्रचलन है। महाभारत काल के अनुसार, भगवान विष्‍णु ने देवताओं की रक्षा के लिए कश्‍यप ऋषि की पत्‍नी अदिती के घर वामन अवतार लिया था। राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी, पृथ्वीलोक का राज्‍य बलि से छीन लिया। उसे पाताल लोक भेजा और स्‍वयं भगवान पाताललोक के सभी दरवाजों के द्वारपाल बने।
नारद के कहने पर मां लक्ष्मी बैकुंठ से पाताल लोक गईं और राजा बलि से मिली। रक्षाबंधन का दिन यानी श्रावणी पूर्णिमा का दिन था। राजा को मां लक्ष्‍मी ने एक सूत्र बांधा और कहा कि आज से आप अमर हो गए हो। इसपर राजा बलि बोले, मेरी कोई बहन नहीं है। श्रावणी मास के दिन तुम आई हो, मुझे रक्षासूत्र बांधा है। आज से तुम मेरी बहन हो, कुछ उपहार मांगो। लक्ष्‍मी बोली, भाई मेरे पास तो सबकुछ है राजपाठ, धन संपदा, लेकिन कोई द्वारपालक रक्षक नही है। आप मेरे भाई हो, अपना द्वारपाल मुझे दे दो। ऐसे में पुराणों के अनुसार भी रक्षाबंन का महत्‍व माना जाता है।
यह है शुभ मुहुर्त :-
तीन अगस्‍त को रक्षाबंधन पर्व पर सुबह नौ बजकर 28 मिनट तक भ्रदा है, ऐसे में यह काल राखी बांधने के लिए शुभ नहीं माना जाता। ज्योतिषाचार्य अनुसार भद्रा खत्‍म होने के बाद सुबह नौ बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक विशेष शूभ मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक भी शूभमुहूर्त के अनुसार राखी पहनाई जा सकती है।
पतंजलि खंड प्रमुख संजय वस्त्रकार ने कहा कि, यह दिन पूजा करने के लिहाज से भी विशेष है। इस समय वैश्‍विक महामारी की शांति और कोरोना पीडि़तों के शीघ्र स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के निमित्‍त भी घर पर एक-एक राखी बनाएं। यह दिन सुख- समृद्धि, सामाजिक व्‍यवस्‍था के लिए भी शुभ है।
रक्षाबंधन का भाई के कलाई पर बांधने वाला सूत्र रेशमी या सूती से बनाएं। उसमें सरसों, केसर, चंदन, अक्षत, दूर्वा रखकर रंगीन सूत के डोरे में बांधे और अपने मकान के शुद्ध स्‍थान पर कलश आदि स्‍थापना करके उसपर यथाविधि पूजा करें।

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