विदेशी पक्षियों का बसेरा के लिए नीम गांव डेम को संरक्षित किया जाएगा

छत्तीसगढ़


मत्स्याखेट और पक्षियों के शिकार पर लग चुका है प्रतिबंध

जशपुर ।रसिया, मंगोलिया, कजाकिस्तान, और यूरोप से ठंड के मौसम में आने वाले मेहमान पक्षियों के बसेरे के रूप में प्रसिद्ध जशपुर, जिले के नीमगांव डेम को संरक्षित और संर्वधित करने की विस्तृत कार्ययोजना जिला प्रशासन द्वारा तैयार की जा रही है। यहां आने वाले मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के मद्देनजर डेम के चारों ओर वृक्षापरोपण कराकर इसको संरक्षित किया जाएगा। ज्ञातव्य है कि नीमगांव डेम में मत्स्याखेट और मेहमान पक्षियों के शिकार पर पहले ही प्रशासन प्रतिबंध लगा चुका है। इस डेम में मछली मारने अथवा पक्षियों के शिकार करते पाए जाने पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई किए जाने का सुचना बोर्ड जगह-जगह लगाया गया है।
कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, वनमण्डालाधिकारी कृष्ण जाधव ने आज संयुक्त रूप से नीमगांव डेम का मुआयना किया और इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए जशपुर वाईल्ड लाईफ वेलफेयर फाउण्डेशन के पदाधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर ने यहां वांच टावर का निर्माण कराये जाने के साथ ही कैम्पा से ब्लाक प्लांटेशन कराए जाने की बात कही। डेम एरिया के उथले हिस्से को आईलैण्ड (टापू) का स्वरूप देने का भी निर्णय लिया गया ताकि मेहमान पक्षी इस आईलैण्ड पर बिना किसी डर भय के स्वछंद विचरण कर सकें।
कलेक्टर ने मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के प्रति आसपास सभी गांवों के ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें इसके प्रति जागरूक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीणों की एक समिति बनाने की बात कही। इस समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह नीमगांव डेम में मछली मारने पर रोक लगाए और यहां आने वाले पक्षियों की सुरक्षा करें। वाईल्ड लाईफ वेलफेयर फाउण्डेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि डेम एरिया के उथले हिस्से में पहले बेशरम की घनी झाड़ियां, विदेशी पक्षियों के घोंसले और प्रजनन (ब्रीडिंग) के लिए काफी सुरक्षित थीं, परंतु आस-पास के ग्रामीणों द्वारा जलाऊ के लिए इन बेषरम की झाड़ियों को लगातार काटा जा रहा है। इसकी वजह से यह स्थान अब मेहमान पक्षियों के घोंसले और ब्रीडिंग के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। सौरभ सिंह का कहना था कि इस वर्ष नीमगांव डेम में रूड्डी शेल्डक, बार हेडेड गोसे, और नॉर्दन पिटनेल नामक आने वाले मेहमान पक्षियों की संख्या 60 से अधिक थी जो अब घटकर मात्र 42 रह गई है। बेषरम की झाड़ियों की कटाई और विदेषी पक्षियों का शिकार किया जाना इनकी संख्या में कमी आने का प्रमुख कारण है। नीमगांव के जागरूक ग्रामीण साधो राम ने बताया कि पहले इस इलाके में हजारों की संख्या में रंग-बिरंगी विदेषी पक्षी आते थे, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों से आया करते थे। समय के साथ यहां आने वाले विदेषी पक्षियों की संख्या में कमी होते गई और बाहर से आने वाले पर्यटक भी कम हो गए। कलेक्टर ने वाईल्ड लाईफ फाउण्डेशन के पदाधिकारियों की सुझाव पर आवष्यक कार्रवाई करने, डेम के खराब स्लूज गेट की मरम्मत तथा विदेशी पक्षियों के विचरण के लिए यहां पर्याप्त जल संरक्षित करने की बात कही।

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