तीज  पर्व 21 अगस्त  को  मनाया जाएगा

By. शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल:- छत्तीसगढ़ पारंपरिक तीज का पर्व 21 अगस्त 2020 को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा इसके लिए अंचल की महिलाओं ने विशेष तैयारी की है. इस साल कोरोना संकट के चलते महिलाएं अपने मायके में रह कर अपने पति की लंबी आयु की कामना को लेकर व्रत रखेंगे। उल्लेखनीय है कि तीज हरितालिका पर्व छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्योहारों में एक है हरतालिका तीज का पर्व दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना से जुड़ा है साथ ही यहां पर हमें अपने घर परिवार और पारंपरिक मूल्यों से भी होता है यही वजह है कि वर्तमान कोरोना काल में इस पर्व की महत्ता और ज्यादा बढ़ गई है . इस पारंपरिक पर्व को हम अपने उमंग उल्लास से मनाए पर्व त्योहारों को मनाने से जुड़ी खुशियों के मायने और अपने के साथ ही अहमियत कोरोना कॉल में कुछ समझा दिए परिवार और परंपरा से जोड़कर रखने वाले पर मन जीवन को सुख देते हैं ।यहां पर भी सब हरतालिका तीज से विवाहित महिलाएं ही नहीं कुछ और अविवाहित कन्याए भी तीज पर्व के साथ मनाती हैं. माना जाता है कि इस दिन मां गौरी पार्वती और भगवान शिव की पूजा सौभाग्य देती है ।यह शादीशुदा महिलाएं जीवन खुशियों के लिए करती है तो लड़कियां अच्छा जीवनसाथी पाने की कामना करते हैं। माध्यम हरतालिका तीज जैसे पर इसमें और भावनात्मक भाव को व्यक्त करने का माध्यम है यह व्रत पर महिलाओं के मन में मौजूद परिवारिक सामाजिक समय का महत्व अवसर भी देता है अपने घर परिवार की खुशियों की चाह सबसे ऊपर होती है. भारतीय समाज में महिलाएं सबसे अधिक अपनों की खुशियों की कामना करती है तभी तो पूरी निष्ठा के साथ परिवार की खुशी और सुख समृद्धि के कायम रखने में जुटी हैं उनकी इच्छा होती है उनका जीवन खुशियों से भरा रहे और सुरक्षित रहें जीवन में उल्लास हरतालिका तीज ऐसे तीज जैसे लोक पर्व मन में उल्लास जगाने वाले पूजा भी साथ छोड़ आते हैं मन का नहीं घर के आंगन का भी माहौल बदलते हैं. कोरोनावायरस की घर बंदी में यह बदलाव बहुत महत्व रखता है. इन दिनों घर के आंगन तक सिमट की सभी सदस्यों की जिंदगी थकी सी हो गई है वहीं महिलाओं के लिए भागदौड़ बढ़ गई है. ऐसे में एक परिवार के लिए उन्हें अपने लिए समय मिलेगा या पर उनके मन को नए रंगों से भर देगा. तीजा मे चूड़ियां नई साड़ियां पहनकर खुशियों बढ़ता है परिवार से जुड़ाव यह त्यौहार आपके जीवन के भावनात्मक बंधन को और मजबूती देने वाला है.

यहां तो साथ ही नहीं ऐसे त्यौहार परिवार को जोड़ते हैं परंपरागत को सजाते हैं कोरोना संकट में इन जीवन मूल्यों और भावनात्मक जुड़ाव के प्रभाव को जो सीधे-सीधे समझाती है. जिंदगी के हर मोड़ पर अच्छे बुरे दिन आते जाते रहते हैं लेकिन किसी भी मुश्किल कठिन परिस्थिति में ही इंसान को थमते है। शिव पार्वती की पूजन होती है पंडित हेमंन प्रसाद मिश्रा बताते हैं कि वैवाहिक जीवन को खुशहाली की कामना से जुड़ा यह पर्व भगवान शिव और मां गौरी को समर्पित है उनसे खुशियां और इसने वरदान मांगने का पर्व है. इसलिए महिलाएं हरतालिका तीज पर शिव पार्वती का चंदन पूजन कर सफल और सज्जन व्यक्ति हैं शिव पार्वती का समर्पण का प्रतीक है जिसने उनके आदर्श जीवन को पूछते हुए स्त्रियां यह कामना करती है कि जीवन साथी साथ भी है कि हमारे देश में महिलाएं अपने जीवन साथी के लिए कितना गहरा जुड़ाव रखती हैं ।

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