गणेश चतुर्थी को   खास योग बन रहा : पंडित ऐमन प्रसाद मिश्र

गणेश चतुर्थी की तैयारी जोरों पर…

By. शिवचरण सिन्हा

कांकेर. दुर्गुकोंदल. अंचल में गणेश चतुर्थी की तैयारी कोरोना महामारी के प्रभाव के बावजूद जोरों पर हैं.पंडित ऐमन प्रसाद मिश्र के अनुसार इस चतुर्थी को बहुत ही खास योग बन रहा। ऐसा योग 126 साल बाद बना है। इस साल 22 अगस्त यानी शनिवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। गणेशजी को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है। कोई भी शुभ कार्य करने से पहले गणेश जी की आरती की जाती है। गणेश चतुर्थी पर लोग गणेश जी को अपने घर लाते हैं, गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन धूमधाम के साथ उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है और अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना की जाती है।

22 अगस्त को गणेश चतुर्थी

22 अगस्त शनिवार के दिन गणेश चतुर्थी शाम 7:57 बजे तक है और हस्त नक्षत्र भी शाम 7:10 बजे तक है। दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शाम 4 बजकर 48 मिनट तक चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया है।
इस वर्ष गणेश चतुर्थी ऐसे समय में मनाई जा रही है जब सूर्य सिंह राशि में और मंगल मेष राशि में हैं। सूर्य और मंगल का यह योग 126 साल बाद बन रहा है। यह योग विभिन्न राशियों के लिए अत्यंत फलदायी रहेगा। गणेश चतुर्थी पर हर साल जगह-जगह झांकी पांडाल सजाए जाते थे व प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं, लेकिन इस वर्ष कोरोना के चलते गणेश जी की झांकियां लगाना प्रतिबंधित है।

गणेश चतुर्थी में पूजन विधि

गणेश चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नानादि करें.
धूमधाम के साथ गणेश जी की प्रतिमा को लाकर विराजमान करें।
गणेश जी की प्रतिमा को किसी चौकी पर आसन लगाकर स्थापित करें।
साथ ही एक कलश में सुपारी डाल कर किसी कोरे (नए) कपड़े में बांधकर रखें।
भगवान गणेश को स्थापित करने के बाद पूरे परिवार सहित उनकी पूजा करें।
सिंदूर और दूर्वा अर्पित करें।
गणेश जी को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं।
गणेश जी की कथा पढ़ें या सुनें, गणेश चालीसा का पाठ करें।
पूजा के बाद सबसे अंत में रोज गणेश जी की आरती जरुर गाएं।

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