कुपोषण से मुक्ति के लिए घर-घर पहुंचाया जा रहा सूखा राशन


राजनांदगांव। बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए जिले में कोरोना संक्रमणकाल के दौर में भी आंगनबाड़ी केंद्र तथा मितानिनों के माध्यम से चिन्हांकित लाभार्थियों तक सूखा राशन पहुंचाया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप कुपोषण में पहले की अपेक्षा अब कमी नजर आ रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्तमान में नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत चिन्हांकित लाभार्थियों को सूखा राशन (चावल, गेहूं, दाल) स्थानीय रूचि एवं उपलब्धता के अनुसार अन्य पौष्टिक आहार का पैकेट बनाकर प्रदान करने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश में कहा गया है कि वर्तमान में कोरोना वायरस कोविड-19 की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत लोगों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर पर विपरित प्रभाव न पड़े, इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत हितग्राहियों को 100 ग्राम चावल, 25 ग्राम दाल एवं अन्य चना, गुड़, मूंगफली, अंडा, सोया बड़ी जैसी पौष्टिक सामग्री घर-घर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में मई माह तक 3,47,000 लाभार्थियों को सूखा राशन प्रदान किया गया है। सूखा राशन वितरित करते समय कोरोना वायरस कोविड-19 के फैलाव की रोकथाम के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए स्वच्छता एवं सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए राशन का वितरण किया गया है।
6 माह से 6 वर्ष के कुपोषित एवं एनीमिक बच्चे तथा 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की एनीमिक महिलाओं को कुपोषण एवं एनीमिया से मुक्ति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान आरंभ किया गया था। इस संबंध में सीएमएचओ राजनांदगांव डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि कोरोना संक्रमणकाल की वजह से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत लाभार्थियों को गर्म भोजन के स्थान पर वर्तमान में सूखा राशन वितरित करने की व्यवस्था की गई है। इसी तरह महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरेंटाइन सेंटर में रह रहे सभी महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित भवन में ठहराकर उनके टीकाकरण, आवश्यक दवाई व स्वास्थ्य परीक्षण की पुख्ता व्यवस्था भी की गई है।


67,889 बच्चे कुपोषण से मुक्त


छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और विभिन्न योजनाओं के एकीकृत प्लान से बच्चों में कुपोषण दूर करने में बड़ी सफलता देखी जा रही है। वर्ष 2019 में किए गए वजन त्यौहार से प्राप्त सरकारी आंकड़ों के अनुसार की तुलना में प्रदेश में मार्च 2020 तक 67,889 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए हैं। इस तरह कुपोषित बच्चों की संख्या में लगभग 14 प्रतिशत की कमी आई है, जो कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग में एक उत्साहवर्धक बात है।


ऐसे शुरू हुआ प्रयास


छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की दर को देखते हुए प्रदेश को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त करने को अभियान की शुरूआत की थी। राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार प्रदेश के 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 38 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से ग्रस्त थे और 15 से 49 वर्ष की लगभग 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थीं। संख्यात्मक रूप से इन आंकड़ों को देखें तो प्रदेश में लगभग 9,70,000 बच्चे कुपोषित थे। इनमें से अधिकांश आदिवासी और दूरस्थ वनांचल इलाकों के बच्चे थे। इन आंकड़ों को राज्य सरकार ने एक चुनौती के रूप में लिया था और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की संकल्पना के साथ महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 से पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की थी।


वनांचल के गांवों में पायलट प्रोजेक्ट


प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई। दंतेवाड़ा जिले में पंचायतों के माध्यम से गर्म पौष्टिक भोजन और धमतरी जिले में लइका जतन ठउर जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया। जिला खनिज न्यास निधि का एक बेहतर उपयोग सुपोषण अभियान के तहत गरम भोजन प्रदान करने की व्यवस्था की गई। इसकी सफलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने इस अभियान को अब पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है।


एनीमिया प्रभावितों को आयरन फोलिक एसिड व कृमिनाशक गोली


अभियान के तहत चिन्हांकित बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषक आहार के अतिरिक्त एनीमिया प्रभावितों को आयरन फोलिक एसिड व कृमिनाशक गोली दी जा रही है। प्रदेश को आगामी 3 वर्षों में कुपोषण से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग व स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।


आंगनबाड़ी बंद, लेकिन व्यवस्था सुचारू

कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रuण के लिए सभी आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों को फिलहाल बंद किया गया है। ऐसी स्थिति में बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रदेश के 51,455 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लगभग 28,78,000 हितग्राहियों को घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट पोषक आहार का वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है।

NEWS27_REPORTER

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