बांसुरी वादक सतीश सिन्हा ने शास्त्रीय संगीत के अलावा लोक संगीत में एक अलग पहचान बनाई

By. शिवचरण सिन्हा

कांकेर. दुर्गुकोंडल . विकासखंड दुर्गुकोंडल के अंतर्गत ग्राम पचायत चाऊरगाव कोडेकुसे जन्म स्थान जो कि वर्तमान में अपना जीवन यापन एवं प्राथमिक शिक्षा विकासखंड दुर्गुकोंडल में हुआ उसके पश्चात वे श्रीमती दशरी बाई सिन्हा व कमल सिंह सिन्हा के घर जन्मे सतीश सिन्हा होनहार पुत्रों में से एक हैं।बचपने से संगीत के प्रति रूचि रखने वाले सतीश सिन्हा अनगिनत मंचों मे अपने बाँसुरी वादन का लोहा मनवाया हैं।वही शास्त्रीय संगीत के अलावा लोक संगीत मे भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है

सांस्कृतिक विरासत….

बचपन से ही संगीत के प्रति अथाह प्रेम रखने स्वयं की इच्छा शक्ति को प्रबल करते हुए बाँसुरी वादन् के लिए अपना लक्ष्य रखा।छत्तीसगढ़ के भीष्म पितामह स्वनामधन्य प्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम चंदैनी गोंदा के संचालक स्व.खुमान लाल साव के सानिध्य में लोक विधा कि बारिकियों को सींखा व लगातार तीन चार वर्षो तक अपनी सेवा चंदैनी गोंदा में दी।तत्पश्चात अचंल के नामहस्त लोक गायक महादेव हिरवानी कृत धरोहर लोक सांस्कृतिक मंच मे बाँसुरी वादन का पक्ष संम्हाला और नये गति के साथ आगे बढ़ने लगे।इन्ही दिनों कुछ नया करने तथा सिंखने के उद्देश्य को लेकर अगले क्रम में छत्तीसगढ़ की स्वर कोकिला श्रीमती कविता वासनिक कृत अनुराग धारा लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में पर्दापण किया, और यही  से इन्होंने संगीत जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

सांगितीक सम्मान…..

बाँसुरी वादक सतीश सिन्हा को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के माध्यम से होनहार कलाकार हेतु सम्मानित किया गया।वहीं खेल युवक कल्याण विभाग के द्वारा आयोजित प्रतियोगिता मे शानदार वादन के लिए सम्मानित किया गया।छत्तीसगढ़ के साथ ही इन्होंने दिल्ली,बैगलोर, अहमदाबाद, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में अपने वादन का लोहा मनवाया।

सांगितीक गुरु……

सतीश सिन्हा प्रारंभिक गुरु अपने माता पिता को मानते हैं।उनका मानना है कि माता पिता के विश्वास पर उन्होंने बाँसुरी वादन का क्षेत्र अपनाया, इन्होंने एशिया की एकमात्र संगीत विश्व विद्यालय इंदिरा कला संगीत विश्व विधालय खैरागढ़ से शास्त्रीय संगीत में डिप्लोमा हासिल किया।वहीं लोक संगीत में शनैःशनैः इनका रूझान बढऩे लगा और इन्होंने स्वं खुमान साव जी,ओमप्रकाश साहू तथा छत्तीसगढ़ के होनहार बाँसुरी वादक व छत्तीसगढ़ी फिल्मों के संगीतकार, गीतकार, गायक, अदाकार दुष्यन्त हरमुख से क्रमबद्ध शिक्षा हासिल की और अपने गुरुओं का गौरवमान बढाया।

पारिवारिक जीवन,पालन पोषण के लिये…

सतीश सिन्हा का छोटा परिवार और सुखी परिवार हैं।पत्नी के निरंतर सेवा और सहयोग के साथ माता पिता के स्नेह से परिवार का पालन पोषण आसानी से हल हो जाता हैं।वर्तमान में सिन्हा भिलाई इस्पात संयंत्र।द्वारा संचालित अक्षय पात्र सांगितीक संस्था में अपने शिष्यों को संगीत की शिक्षा प्रदान कर रहे।इसके साथ ही लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम लोक गायिका स्वर कोकिला श्रीमती कविता वासनिक कृत अनुराग धारा में श्रीमती कविता वासनिक,सुश्री हिमानी वासनिक, प्रभू सिन्हा हर्ष मेश्राम, हरिशंकर नायक, हरिश पाण्डया, मुकेश मानिकपुरी, सुमीत साहू, विकास सिन्हा, राकेश सिन्हा पप्पू साहू,नरेन्द्र जलक्षत्रिय,मुकेश, योगेश,राजकुमार साहू इत्यादि कलाकारों के साथ लोक मंच मे छत्तीसगढ़ी गीतों तथा छत्तीसगढ़ी महतारी की सेवा कर रहे है।इनके उज्जवल भविष्य के लिए सारा कलाकार कुनबा इन्हें शुभकामनाएं दी है विकासखंड दुर्गुकोंडल जिला कांकेर के लिए यह एक कलाकार जो कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अन्य प्रांतों में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं सचमुच विकासखंड दुर्गुकोंडल के लिए गौरव की बात है ।

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