काव्य लेख : शिक्षक दिवस विशेष


रचनाकार :- प्रमेशदीप मानिकपुरी


दीपक तू कितना अच्छा,
तू कितना कर्तव्य का सच्चा I
सबको कर्त्तव्य का पाठ पढ़ाता हैं,
सीख नहीं देता प्रत्यक्ष कर दिखलाता II2
दीपक………..दिखलाता हैं II
अंधकार हो जँहा,तू ही उसे मिटाता हैं I2
जँहा को रोशन कर,कर्तव्य बोध कराता हैं II
दीपक सम हैं गुरुदेव हमारे,जो शिक्षक कहलाता है I
विद्या के इस प्रांगण मे,ज्ञान सरिता नित्य बहाता हैं II2
दीपक………..दिखलाता हैं II
गुरुवर से तुम सीख ले लो,
विद्या का तुम भीख ले लो I
यही विद्या सर्वत्र काम आता हैं,
जीवन के हर मोड़ पर हमें सफल बनाता हैं II2
दीपक………..दिखलाता हैं II
उन चरणों मे प्रमेशदीप का आज शत -शत नमन हैं I
प्रयास से जिसके विद्यालय का महकता सदा चमन हैं
शिक्षक दिवस के अवसर पर लेखनी करती उन्हें प्रणाम I
जिनके आशीष से पत्थर भी,प्रभु का रूप पाता हैं I2
दीपक……….दिखलाता हैं II

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