पितृ पक्ष के चतुर्थी श्राद्ध में   पितरों का आर्शीवाद   मिलता है…

by… शिवचरण सिन्हा


दुर्गुकोंडल : पंचांग के अनुसार 6 सितंबर को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है. इस दिन पितृ पक्ष का चतुर्थ श्राद्ध है. इस समय पितृ पक्ष चल रहे हैं. धर्म कर्म की दृष्टि से इस पक्ष को बहुत ही महत्व पूर्ण माना गया है. पंडित हेमंन प्रसाद मिश्रा ने बताया कि आश्विनी मास में पितरों को याद किया जाता है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है. मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज पृथ्वी का भ्रमण करते हैं, इसलिए इस महीने दान- धर्म का विशेष महत्व बताया गया है|
महाभारत में आता है पितृ पक्ष का वर्णन
महाभारत की कथा में भी पितृ पक्ष का वर्णन आता है. कहा जाता है कि भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को पितृ पूजा के रहस्य और महत्व के बारे में बताया था. वहीं श्रीकृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने कर्ण का श्राद्ध किया था|
चतुर्थी श्राद्व में पिंड दान की विधि
पंचांग के अनुसार आश्विन मास की चतुर्थी तिथि को चौथा श्राद्ध है. इस दिन श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण और दान आदि के कार्य करने चाहिए. पिंडदान में चावल, गाय का दूध, घी, गुड़ और शहद को मिलाकर बने पिंडों को पितरों को अर्पित करना चाहिए. जल में काले तिल, जौ, कुशा, सफेद फूल मिलाकर तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं. तर्पण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद दान और ब्राह्मण भोज करना चाहिए|
श्राद्ध कर्म की विधि
श्राद्ध कर्म की विधि अति महत्चपूर्ण मानी गई है. मान्यता के अनुसार पितरों का श्राद्ध मृत्यु तिथि के अनुसार ही करना उचित रहता है. पिता का श्राद्ध अष्टमी और माता का श्राद्ध नवमी तिथि को करना अच्छा माना गया है. वहीं यदि अकाल मृत्यु होने पर श्राद्ध चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करना श्रेष्ठ होता है. इसके साथ ही साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है. वहीं जिन लोगों को पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है उन्हें अमावस्या की तिथि में श्राद्ध करना चाहिए| ।

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