कृषि विकास योजना के अंतर्गत  किसानों को जीवामृत बनाने की विधि बताया

By.. शिवचरण सिन्हा

दुर्गूकोंदल. विकास खंड दुर्गूकोंदल के अंतर्गत परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राम कोदापाखा में कृषक समाज को जीवामृत बनाने की विधि विस्तृत जानकारी देते हुए जीवामृत बनाने हेतु पीवीसी ड्रम का वितरण निशुल्क वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी डी आर कोमरा के मार्गदर्शन मे जनपद पंचायत के जनपद सदस्य एव सभापति देवलाल नरेटी सरपंच अनूपा नरेटी उपसरपंच दिनेश नरेटी के अतिथि में कृषक समूह को निशुल्क वितरण किया गया. इस अवसर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एन के साहु ने तरल जीवामृत बनाने की विधि के संबंध में विस्तृत जानकारी जिसमें उन्होंने बताया कि देसी गाय का 10 किलो गोबर देसी भैंस या गाय का भी ले सकते हैं. 10 लीटर गोमूत्र पुराना सड़ा हुआ गुड 1किलो अगर हो तो 4 लीटर गन्ने का रस का भी प्रयोग कर सकते हैं भी प्रकार की दाल का 1 किलो आटा उड़द अरहर चना का आटा बरगद का पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी 1 किलो इसे सजीव मिट्टी भी कहते हैं या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी न मिले तो ऐसे खेत की मिट्टी प्रयोग की जा सकती है जिसमें ना डला हो जीवामृत में 200 लीटर पानी एक बड़ा पात्र एक बड़ा पात्र ड्रम आदि बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी सबसे अच्छी होती है. क्योंकि बरगद और पीपल के हर समय ऑक्सीजन देने वाले ज्यादा ऑक्सीजन ना देने वाले परिवारों की संख्या अधिक पाई जाती है जीवाणु खेत के लिए बहुत ही आवश्यक एवं लाभदायक है. वितरण के दौरान ग्राम के कृषक समूह के सदस्य एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.

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