27 वर्षों बाद B.Ed /D.ed के संबंध मे  कार्यवाही औचित्यहीन

By.. अविनाश वाधवा

न्यायालय के आदेश की अवमानना


बलौदा बाजार के एक समाचार पत्र के आंचलिक खबर में बी एड /डी एड के दो वेतन वृद्धि देने के कोर्ट के आदेश को भ्रामक रूप से छापने पर संघ ने बताया है कि उक्त समाचार पत्र द्वारा “हाईकोर्ट के 5/1 /2011 के आदेश के खिलाफ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रिट याचिका लगाई गई है । तब 4 अप्रैल 2014 को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया था तथा 1993 के बाद प्रधान पाठकों को दो वेतन वृद्धि नहीं देने के आदेश की भ्रामक एवं तथ्यहीन खबर छपवाई गई थी” ,जो कि पूर्णरूपेण गलत है l उक्त समाचार पत्र द्वारा कोर्ट के उल्लेख कर भ्रामक खबर छापने को छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ द्वारा दुर्भाग्यपूर्ण माना गया है । संघ का यह मानना है कि उक्त खबर जिन शिक्षक को दो वेतन वृद्धि नहीं मिल रहा है उनके द्वारा पत्रकार को गुमराह कर खबर छपवा दी गई है l जबकि शासन द्वारा जारी आदेश 7.3.20 एवं जिला शिक्षा अधिकारी बलोदा बाजार के आदेश 1297/12.6.2020 को प्रधान पाठको द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दिया गया है जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा प्रधान पाठकों पर किसी भी प्रकार की वेतन वृद्धि के विरुद्ध रिकवरी नहीं करने का आदेश दिया गया है तथा अभी भी न्यायालय में मामला विचाराधीन है ।
संघ ने उक्त प्रकरण के बारे में बताया है कि 5 /01/2011 के आदेश को आज दिनांक तक कभी भी राज्य शासन द्वारा कोर्ट में चुनौती नहीं दिया गया है तथा यह आदेश नियुक्ति के पूर्व स्वयं के व्यय पर बी एड /डी एड करने वालों को दो वेतन वृद्धि देने के संदर्भ में है l तथा 4 अप्रैल 2014 के हाईकोर्ट का आदेश 1993 के पूर्व नियुक्त सेवाकाल में विभागीय अनुमति लेकर बी एड /डी एड करने वालों को वेतन वृद्धि देने के संदर्भ में है जो प्रकरण क्रमांक 4030के रिट अपील का निर्णय है जो शासन ने लगाया था। संघ के पदाधिकारियों ने बताया है कि जिन शिक्षकों को नियमों में नहीं आने या विभिन्न कारणों से दो वेतन वृद्धि नहीं मिला उनके द्वारा लगातार विभिन्न स्तरों पर शिकायत की गई और जब उनकी इन तथ्यहीन शिकायत में कोई कार्यवाही नहीं हुई तब उनके द्वारा पत्रकार बंधुओं को गुमराह कर उक्त खबर छपवाई गई जिसका संघ खंडन करता है। उन्होंने बताया है कि शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को 2 वेतन वृद्धि देने के लिए 1998 के पूर्व तथा 2007 ,2011, 2014 ,2017 आदि में विभिन्न आदेश निकाले हैं।उपरोक्त आदेश माननीय हाईकोर्ट बिलासपुर के आदेश के बाद जारी हुआ है जिसमें शासन के द्वारा 16 जून 1993 को बी एड/डी एड योग्यता को अनिवार्य बनाने का तर्क रख कर, 1993 के बाद नियुक्त शिक्षकों को दो वेतन वृद्धि नहीं देने का तर्क रखा था जिससे माननीय हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया अर्थात शासन को कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा और शासन को दो वेतन वृद्धि प्रदान करने के निर्णय के परिपालन में शासन द्वारा यह आदेश जारी किया गया है। वर्तमान मे शासनादेश द्वारा समस्त सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधान पाठक, व्याख्याता के 2 वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है परंतु अधिकारियों द्वारा इन आदेश के आड़ में केवल प्रधान पाठकों को ही निशाने पर रखकर कार्यवाही की जा रही है जो कि न्यायोचित नहीं है ऐसा प्रतीत होता है कि यह संपूर्ण कार्यवाही प्रधान पाठकों के लिए दुर्भावनावश किया जा रहा है।जिसका छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ के द्वारा कड़ी निंदा की जाती है।


BHUWAN LAL
छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ ब्लाक इकाई सिमगा

NEWS27_REPORTER

http://news27.org

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *