मोनेट कंपनी के समक्ष  ग्रामीणों ने    1000 मजदूरों को काम में रखने की मांग…

By.. शिवचरण सिन्हा

ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों को बिना सहमति के काम चालू करने पर जमकर लगाई फटकार

दुर्गूकोंदल। हाहालद्दी पहाड़ी में लौह अयस्क उत्खनन हेतु मोनेट कंपनी को लीज मिली है। लीज मिलते कंपनी के द्वारा ग्रामीणों को बिना विश्वास में लिये कंपनी काम प्रारंभ कर दिया है। जिससे बौखलाए दुर्गूकोंदल, हाहालद्दी, दोड़दे, भुसकी, खुटगांव, पलाचुर, गोपालटोला, भुरकागुदुम, बोदेली के ग्रामीणों ने एकजुट होकर मोनेट कंपनी के खिलाफ आवाज बुलंद करने ग्राम दोड़दे बैठक लिया। और माइंस के अधिकारी अमित पांडे, युगान्तर वर्मा से सवाल किया। ग्रामीणों के सहमति के बिना काम चालू करने को लेकर कंपनी के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। और ग्रामीणों ने कंपनी के समक्ष मांग रखी, 1000हजार मजदूरों को काम पर रखा जाये। काम चालू करने के पहले प्रशिक्षण दिया जाये। यदि 1000हजार मजदूर नहीं रखती है, तो काम कभी भी चालू ना हो। इसलिए कंपनी शुरू में लालच देते हैं। और काम चालू होने के बाद पुलिस प्रशासन को आगे रखकर दादागिरी करते हैं। एक दूसरे गांव के लोगों को आपस लड़ाते हैं। गांव वालों की हक की लड़ाई कभी पूरी नहीं होती है। पुलिस और प्रशासन भी कंपनी के समर्थन में आते हैं। कंपनी यदि काम चालू करती है। तो क्षेत्र 1हजार लोगों को काम दे। तकनीकी प्रशिक्षण दे। तभी काम चालू हो। यदि ठगने की इरादा है, तो कभी भी खनन परिवहन कार्य चालू ना हो। पूर्णतः बंद किया जाये। बजरंग कंपनी, पुष्प स्टील कंपनी भी माइंस चालू करते समय कई वादें और सुविधा देने की बात कही है, लेकिन अभी तक कंपनी अपनी वादें पूरी नहीं कर रही है। पुष्प स्टील कंपनी गांव के पूरे मजदूर की रखने का आश्वासन दिया था। लेकिन जब पूरे मजदूर रखने की बारी आई तो पुलिस और तहसीलदार को आगे खड़े कर ग्रामीणों के आवाज को दबा दिया। माइंस खुलने के बाद कोई भी मांग पूरा नहीं होती है। इसलिए सुविधा देने में मोनेट कंपनी अक्षम है, 1हजार मजदूर नहीं रख सकते हैं, तो कभी भी माइंस ना खुले। इसका हम विरोध करते हैं। कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों के मांग को कंपनी के समक्ष रखने की बात कही है। नष्ट हो जायेंगे प्राकृतिक और दैविय स्थल हाहालद्दी पहाड़ी में देवी देवताओं का वास है। प्राकृतिक रूप से निर्मित पर्यटन स्थल है, झरना भी है। लेकिन माइंस खुलते ही सभी नष्ट हो जायेंगे। कंपनी लौह अयस्क खुदाई के दौरान हजारों पेड़ों की कटाई करती है। लेकिन एक भी पेड़ माइंस क्षेत्र में नहीं लगाती है। वनोपज नष्ट होते हैं। लेकिन क्षतिपूर्ति नहीं देती है। बजरंग माइंस की क्षतिपूर्ति सिर्फ एक बार ग्रामीणों को मिली है। इसके बाद क्षतिपूर्ति राशि नहीं दिया जा रहा। नियमत: हर साल क्षतिपूर्ति राशि दी जानी है, लेकिन कंपनी सिर्फ ठेंगा दिखाती है। इस दौरान ग्राम पटेल, ग्राम गायता नोहरसिंग तुलावी, घनश्याम सिन्हा, जनपद सदस्य राधा जैन, अशोक जैन, सरपंच सगनी तुलावी, सरपंच पार्वती मंडावी, सगनू दुग्गा, घसिया सिन्हा, हीरूराम सलाम, दयाराम तुलावी, सोमल जैन, चंद्रेश दुग्गा, सभी वार्डपंच और सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुष उपस्थित थे।

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