सरहद में लड़ रहे सैनिकों को रक्त दान करने को तैयार : प्रेरक संघ

छत्तीसगढ़

रायपुर।प्रेरकों ने गांव में शासन के विभिन्न अभियानों के तहत सतत शिक्षा ,प्रौढ़ शिक्षा आदि के जरिए प्रदेश में साक्षरता दर को बढ़ाने में भूमिका निभाई हैं । इन्होंने गांव में शिक्षण मित्र का हिस्सा बनकर गांवों में अक्षर ज्ञान से लेकर लोगों को पढ़ाई के लिए प्रेरित कर साक्षर बनाया हैं । प्रेरकों ने लंबे समय से शासन के अधिकृत शैक्षणिक क्षेत्र में सामाजिक कार्य कर चुके हैं । सेवा समाप्ति के बाद प्रेरकों बेरोजगारी की मात झेल रहा हैं शिक्षा का दीप जलाने वाला आज खुद अंधेरे में जीवन जी रहा है। छत्तीसगढ़ प्रेरक संघ अपनी मांगों को लेकर गुरुवार को भी बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल एकता दिखाई । वहीं समाज में सेवा भाव जागृत करते हुए सैकड़ों प्रेरकों ने रक्तदान किया। संदीप द्विवेदी प्रेरक संघ प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि साक्षर भारत 2007 में भर्ती हुआ था यह 31 मार्च 20 18 को शासन ने बिना कारण बताए सेवा समाप्ति कर दी ।गांव में आज भी असाक्षर प्रौढ़ बाकी हैं। सरकार ने शिक्षाकर्मी ,पंचायतकर्मी भर्ती की बात कहकर प्रेरकों को गुमराह और शोषण कर रहा हैं। द्विवेदी ने कहा की प्रेरकों 1 साल से बेरोजगार हैं होने के बावजूद प्रेरकों में आज भी उत्साह उमंग हैं। सरकार ने घोषणा पत्र में संविलियन करने की बात कही गई थी इसको लेकर विभिन्न मंत्रियों को ज्ञापन सौंप गया हैं ,मांगे पूरी नहीं होने पर रक्तदान करने वाला प्रेरक सरकार के विरुद्ध में जा सकता हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य सरहद में लड़ रहे सैनिकों को रक्त दान करने को तैयार हैं वहीं भूपेश बघेल के वजन का 10 गुना रक्तदान किया जायेगा। द्विवेदी ने कहा की भूपेश सरकार प्रेरकों को दो वक्त की रोटी जुटा सके इतना सैलेरी तय करें।

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