सफलता के पीछे नाम आनंदम : सुधांशु महाराज

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रायपुर। विश्व जागृति मिशन के रायपुर मण्डल द्वारा यहाँ बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिवस का प्रातःकालीन सत्र स्वस्थ वृत्त को समर्पित रहा। इसमें सुस्वास्थ्य की महत्ता तथा उत्तम स्वास्थ्य प्राप्ति के उपायों आदि पर गम्भीर चर्चाएँ हुईं, साथ ही ध्यान-योग के सैद्धान्तिक व व्यावहारिक सूत्र दिए गए। मिशन प्रमुख की प्रेरणाएँ पाकर और संगीतमय वातावरण में आध्यात्मिक एवं यौगिक क्रियाओं में भाग लेकर उपस्थित जनमानस भावविभोर हो उठा।

इस अवसर पर प्रखर अध्यात्मवेत्ता आचार्य सुधांशु महाराज ने हजारों की संख्या में उपस्थित स्त्री-पुरुषों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को परमात्मा ने ‘वाणी’ और ‘पाणी’ के रूप में दो बड़ी शक्ति-सामर्थ्य दी हैं। वाणी (जबान) तथा पाणी (हाथ) को बुद्धिरूपी ईश्वरीय सामर्थ्य से जोड़ दिए जाने पर मानव अपने एक छोटे से जीवन में वह कार्य सम्पन्न कर लेता है, जो 84 लाख योनियों में भी सम्भव नहीं हो पाता। उन्होंने अपने समय, ज्ञान, धन एवं बुद्धि को अनावश्यक कार्यों में लगाने से रोकने की सलाह सभी को दी।

सुधांशु महाराज ने धन व समय की कद्र करने को कहा। सुधांशु महाराज ने अपनी दैनन्दिन प्रार्थनाओं में यह प्रार्थना अवश्य शामिल करने को कहा कि हे प्रभु! आप हमें निराशा, हताशा और दीनता के गुह्य अंधेरे से निकालकर आशा, उत्साह एवं उल्लास के प्रकाश की ओर बढ़ा दें। उन्होंने ‘आनन्द’ की व्याख्या करते हुए कहा कि सफलता की सफलता के पीछे का नाम आनन्द है। उन्होंने जीवन में सुख-शान्ति एवं आनन्द के लिए अनेक सूत्र सिखाए तथा स्वस्थ जीवन के लिए ध्यान की प्रभावी विधाएँ सिखायीं।

सुधांशु महाराज ने महान दार्शनिक, तत्वज्ञ ज्ञानी, भारत रत्न डॉ. राधाकृष्ण के जीवन का एक किस्सा शाम को प्रवचन के दौरान बताया उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन जब मैसूर विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे तो विद्यार्थियों को कहते थे जिंदगी जीना सीखो और जीवन स्वतंत्रता और आनंद से सीखो,मैसूर विवि के विद्यार्थी से उनका लगाव ऐसा हो गया था कि जब उनका स्थानांतरण हुआ तो विद्यार्थी उन्हें जाने नही देना चाहते थे पर रोकना भी संभव नही था। विद्यार्थियों का मत था कि पढ़ाने वाले मिल जाते है जीवन देने वाले जीना सीखाने वाले नही मिलते।उनके जाने के समय जाने के लिए तांगा मंगाया जा रहा था तो विद्यार्थियों ने रथ मंगवाया और रथ में बंधे घोड़ो को हटवा कर विद्यार्थी आगे आए और हजारों छात्रों ने रस्सी से रथ को रेलवे स्टेशन तक खींचा। रास्ते मे देखने वाले उत्सुकता से विद्यार्थियों से पूछते थे तो उन्हें जवाब मिलता की हमारे शिक्षक है वह शिक्षक जो विद्या नही पढ़ाते थे हमें जिंदगी देते थे।मैसूर से जाते-जाते अपने विद्यार्थियों से डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था कि मैं दूर जरूर जा रहा हु और जितने भी दूर रहूं मुझसे हृदय जोड़े रहना। ये बातें गुरु और शिष्य के रिश्तों के लिए सुधांशु महाराज ने कहा कि ब्रह्मा विष्णु शिव तीन शक्ति है तीनो की कृपा जीवन मे आना चाहिए और त्रिदेव की शक्ति गुरु से प्राप्त होती है।सद्गुरु के माध्यम से परमात्मा की शक्ति पहुचती है।

आयोजन समिति विश्व जागृति मिशन रायपुर मण्डल ने बताया कि सत्संग का प्रस्तुत कार्यक्रम रविवार 10 मार्च की सन्ध्याकाल सम्पन्न होगा। इस दिन मध्यान्हकाल सामूहिक मन्त्र दीक्षा का कार्यक्रम सम्पन्न होगा। गुरुदीक्षा के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुक्रवार से ही शुरू है। मण्डल प्रधान श्री सुनील सचदेव,मीडिया प्रभारी अश्वनी विग व विनोद शर्मा ने उपस्थित जनो से रायपुर के ग्राम परसदा में सेवारत मिशन के ब्रह्मलोक आश्रम में निर्माणाधीन श्री कैलाश मानसरोवर की रूपरेखा विस्तार से उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष रखी और बताया कि छत्तीसगढ़ की राजधानी में चीन के सीमा क्षेत्र में चले गए भारतवर्ष के ब्रह्याण्ड-प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर की प्रतिकृति स्थापित करने के प्रयत्न मिशन परिवार द्वारा किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस स्थापना में गुरुदेव परम पूज्य सुधांशु महाराज का सशक्त मार्गदर्शन मिल रहा है। उन्होंने इस देव कार्य में हाथ बंटाने की अपील सभी से की।

आनन्दधाम नयी दिल्ली से आए प्रयाग शास्त्री ने बताया कि सत्संग स्थल पर लगे एक दर्जन स्टालों के माध्यम से ढेरों उपयोगी जानकारियाँ आगंतुकों को दी जा रही हैं, जिनमें युगऋषि आयर्वेद, धर्मादा सेवा, साहित्य सेवा, गौशाला सेवा, वृद्धजन सेवा, करुणा सिन्धु अस्पताल सेवा, युगऋषि आरोग्य धाम सेवा, देवदूत सेवा इत्यादि शामिल हैं।

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