जुगल किशोर के कलम से…

जज्बा

-: संघर्ष सफलता की  :-

सब्र नहीं अब संघर्ष करना है,
बेटोक मंजिल तक अब बढना है ,
महज विडंबनायें है परिस्तिथि की,
पर सबसे अब लड़ना है,
चाहे पैरों में पढ़ जाये अब घाव ,
फिर भी उचाईयों पर अब चढ़ना है |

कभी पथरिली तो कभी कोमल होंगी राहें,
यही एहसास जीवन में गढ़ना है,
तो कभी निकलेंगी दर्द की आहें,
फिर भी चलेंगे फैलाकर बाहें,
पाने मंजिल को तुझे,
सब्र नहीं अब संघर्ष करना है|

कभी दिखलाएंगी गलतियाँ तुम्हे,
कभी सिखलायेंगी गलतियाँ तुम्हे,
कभी डूबायेंगी दरिया तुम्हे,
तो कभी दिखाएंगी किनारा तुम्हे,
महसूस करोगे अकेला जब भी,
संघर्ष बताएगा रास्ता तुम्हे |

इंतज़ार न साथ पाने का करना है,
अपनी लड़ाई खुद ही लड़ना है,
सब्र नहीं अब संघर्ष करना है,
बेटोक मंजिल तक अब बढ़ना है |

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