राजनांदगांव  :   फिर हर कोई कहेगा आई एम द बेस्ट एंड आई लव माय सेल्फ


राजनांदगांव। अगर आप मानसिक तौर पर हार रहे हैं तो आप शारीरिक तौर पर जीत नहीं सकते, इस संदेश के साथ लोगों की मानसिक अस्वस्थता पर नियंत्रण तथा इससे बचाव करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जिला राजनांदगांव की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। तंबाकू, सिगरेट या शराब जैसे अन्य मादक पदार्थों का सेवन करने से रोकने के लिए गांव-गांव में जनजागरुकता के प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान की सफलता के लिए स्थानीय संगठनों की भी मदद ली जा रही है, ताकि लोगों की नशे की प्रवृत्ति छुड़ाकर उन्हें मानसिक तौर अस्वस्थ होने से भी रोका जा सके।
जिले में आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के अलग-अलग क्षेत्र में सेल्फी जोन भी बनाए जा रहे हैं, जिसका प्रमुख उद्देश्य लोगों को नशापान की प्रवृत्ति को त्यागने के लिए प्रेरित करना है। जिले के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा बनाए गए सेल्फी जोन में आई एम द बेस्ट एंड आई लव माय सेल्फ स्लोगन का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के गैरसंचारी रोग प्रकोष्ठ के जिला सलाहकार विकास राठौर ने बताया, श्स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य लोगों को मानसिक विकारों से पीड़ित होने से बचाकर एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। इसी क्रम में 13 फरवरी को नगर पालिक निगम राजनांदगांव के मुख्य कार्यालय परिसर में आयोजित किए जा रहे पुष्प महोत्सव में भी सेल्फी जोन बनाया जाएगा, जहां पर मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहन देते हुए लोगों को नशा त्यागने का संकल्प दिलाया जाएगा। इसके अलावा मानसिक विकारों पर नियंत्रण तथा इससे बचाव के उद्देश्य से मानसिक विकारों से पीड़ित होने की स्थिति में इसका त्वरित इलाज कराने के प्रति लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया, सेल्फी जोन को काफी आकर्षक बनाया गया है, ताकि लोग सेल्फी जोन में आकर अपनी सेल्फी लेने हेतु सहजता से प्रेरित हो सकें और सेल्फी जोन के उद्देश्यों के प्रति उन्हें जागरुक किया जा सके।
वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया, अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 तक जिले में 771 नए मानसिक रोगी मिले, जिसमें सबसे अधिक 101 केस साइकोसिस के मिले हैं। वहीं इस अवधि में 59 नए मानसिक रोगियों को मानसिक रोग चिकित्सालय में भर्ती कर उनका इलाज किया गया है। उन्होंने बताया, मानसिक रोग के लक्षणों को यदि समय पर पहचान लिया जाए तो उचित इलाज के जरिए इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, हर मानसिक बीमारी के लक्षण उसके कारक और परिस्थितियों के आधार पर भिन्न होते हैं और ये भावनाओं, विचारों और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। मानसिक बीमारी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं जिनमें उदास महसूस करना, व्याकुल होना, ध्यान केंद्रित करने में कमी होना, भय या चिंता से ग्रस्त होना, बार-बार मनोदशा में परिवर्तन होना, थकान-कमजोरी होना, नींद में दिक्कतों का सामना करना, कभी-कभी दैनिक कार्यों में असमर्थता और भूलने की समस्या होना शामिल हैं। इस विषय पर जन-जागरुकता के ही उद्देश्य से जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर दो घंटे से ज्यादा बिताना खतरनाक : डा. मनोरे

मनोरोग चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शरद मनोरे ने बताया, नशे की प्रवृत्ति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर छाए रहने की सनक भी काफी हद तक लोगों को मनोरोगी बना रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे विभिन्न एप लोगों के दिलो-दिमाग पर हावी हो चुके हैं, जबकि सोशल मीडिया पर दो घंटे से ज्यादा बिताना मनोरोग का संकेत है। सोशल मीडिया पोस्ट पर लाइक, कमेंट या व्यू न आने से यूजर्स में नकारे जाने का भाव पैदा होता है। इससे भावनात्मक बोझ बढ़ता है। वे अन्य दोस्तों के सोशल मीडिया कनेक्शन देखकर सोचते हैं कि दूसरे लोग ज्यादा खुश हैं। इसी तरह वेब सीरीज, गेमिंग और स्मार्ट फोन से लोकप्रियता और पैसे कमाने का चस्का भी बीमार बना रहा है। नतीजतन ज्यादातर युवा अवसाद, कुंठा और भूलने जैसी बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं।



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