कवर्धा। कोविड महामारी के दौर में चिकित्सकों की सेवाओं ने लोगों को जीवन दान देने का काम किया है। अनेक प्रकरणों में देखा गया है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से उनके ही परिजन डरकर साथ छोड़ देते हैं और ऐसे में मरीजों के सीधे संपर्क में रहकर उनकी देखभाल और उपचार का बीड़ा चिकित्सक व उनकी टीम द्वारा उठाया जा रहा है। कवर्धा के कोविड़ अस्पताल में सेवाएं देने वाले ऐसे ही चिकित्सकों ने मरीजों को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं।
कोविड हॉस्पिटल जब से आरंभ हुआ है, तब से डॉ. विवेक चंद्रवंशी अपनी सेवाएं यहां दे रहे हैं। हाल ही में इनकी ड्यूटी समय पर 3 गर्भवती कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव कराया गया। जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं और राहत भरी खबर यह है कि तीनों बच्चे कोविड नेगेटिव हैं। डॉ. चंद्रवंशी कहते हैं, टीम वर्क का हमेशा फायदा मिलता है और कोरोना महामारी जैसे तनावपूर्ण दौर में भी हम कोविड अस्पताल में समन्वय व सेवाभाव से कार्य कर रहे हैं, इसी का परिणाम है कि हम 3 सुरक्षित प्रसव कराने में सफल हो पाए।


मरीजों की इच्छाशक्ति वील पावर आधी दवा का काम करती है : डॉ. आशीष मिश्रा


डॉ. आशीष मिश्रा कोविड अस्पताल में पिछले दिनों घटित एक वाकया याद करते हुए बताते हैं, लगभग 60 वर्ष के बुजुर्ग को कोरोना संक्रमित होने व स्थति काफी गंभीर होने के कारण कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। उक्त बुजुर्ग सांस नहीं ले पा रहे थे और उनकी इच्छा शक्ति भी काफी कमजोर पड़ने लगी थी। वे बार-बार अपने अंतिम समय होने और बच्चों से मिलने की जिद कर रहे थे। उस वक्त मैंने व मेरी मेडिकल टीम ने उनकी काउंसलिंग की, उन्हें जीवन के प्रति आशान्वित किया और हमें भी अपने बच्चों के जैसा समझकर इलाज में साथ देने के लिए निवेदन किया। तकरीबन 2 घण्टे के बाद उनकी स्थिति सामान्य होने लगी और खुशी की बात यह रही कि पूर्ण स्वस्थ होकर दो दिन पहले ही वे अपने बच्चों के पास वापस घर लौट गए। डॉ. मिश्रा कहते हैं किसी भी बीमारी या विपरीत शारीरिक परिस्थिति में मरीज की इच्छाशक्ति का बहुत प्रभाव पड़ता है। हम चिकित्सक केवल जान बचाने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन मरीज के जीने की इच्छाशक्ति आधे इलाज का काम करके हम चिकित्सकों का काम आसान बना देती है। उन्होंने कोरोना से आतंकित होने के बजाय समझदारी से इसका सामना करने व गाइड लाइन का पालन करके खुद को सुरक्षित रखने की अपील जनता से की है।


जब परिजनों ने छोड़ा बुजुर्ग का साथ, हम बने सहारा : डॉ. केशव जायसवाल

डॉ. केशव जायसवाल अपने उस अनुभव को बताते हैं, जब एक बुजुर्ग व्यक्ति के कोविड पॉजिटिव आने पर उनके बेटा-बहु ने मुह मोड़ लिया। बुजुर्ग अक्सर इस बात को लेकर दुखी रहते थे, लेकिन हमारी टीम ने उनको सहारा दिया, उनका मनोबल बढ़ाया। डॉ. जायसवाल बताते हैं, कोविड अस्पताल में हम परिवार की भांति रहकर कार्य करने का पूरा प्रयास करते हैं। कुछ समझदार तो कुछ अजीब से व्यवहार वाले मरीज यहां आते-जाते रहते हैं। वे कहते हैं, कोरोना का खतरा मोल लेकर हमारी टीम पूरी लगन से कार्य कर रही है। हमारी एक स्टाफ नर्स गत दिनों कोरोना संक्रमित हो गई और अब वे इसी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा, मेडिकल स्टाफ के त्याग और मेहनत को सफल बनाने के लिए सहयोग करें, भीड़ में न जाएं, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

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