भानुप्रतापपुर:      पार्षद के संरक्षण में हो रहा था अतिक्रमण, तहसीलदार ने हटवाया

By।शिवचरण सिन्हा

भानुप्रतापपुर। नेताओं के संरक्षण में रसूखदारों द्वारा क्षेत्र में धडल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है। वार्ड क्रमांक 4 तहसीलपारा में एक युवती द्वारा झोपड़ी बनाकर अतिक्रमण किया जा रहा था। मौके पर पहुंच कर तहसीलदार आंनद नेताम व पटवारी ने पूछा तो युवती ने पार्षद द्वारा अनुमति देना बताया गया। जिसके बाद तहसीलदार ने उसे अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। एक दिन पूर्व ही आप पार्टी के कोमल हुपेंडी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को ज्ञापन सौप कर दल्ली रोड में शासकीय भूमि पर चल रहे अवैध निर्माण पर कार्यवाही की मांग की गई थी। आप ने आरोप लगाया था कि प्रशासन रसूखदारों व नेताओ के संरक्षण में बन रहे मकानों पर कार्यवाही नहीं करती वहीं कोई गरीब या जरूरतमंद जब निर्माण कराता है तो उस पर प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जाती है।

ज्ञात हो कि नगर पंचायत तथा आस पास से सटे ग्राम पंचायतों में भु माफियाओं द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जा कर मकान व दुकान का निर्माण कराया जा रहा है। इन भू माफियाओं द्वारा भूमि पर कब्जा कर उन्हें बेच दिया जाता है तथा कुछ महीनों बाद अन्य जगह पर पुनः कब्जा कर लेते हैं। नेताओं के द्वारा मिल रहे संरक्षण से प्रशासन भी इनपर कार्यवाही नहीं करती है। ताजा मामला नगर पंचायत के वार्ड 4 का है जहां पार्षद के संरक्षण में अतिक्रमण किया जा रहा था।

कांकेर रोड पर पुराने व जर्जर हो चुके शासकीय क्वार्टर के बाजू में खाली पड़ी शासकीय भूमि पर एक युवती द्वारा झोपड़ी बनाकर कब्जा किया गया था तथा पक्का मकान बनाने के लिए ईंट व रेत भी डम्प किया गया था। सूचना मिलने पर तहसीलदार व नगर पंचायत के अधिकारी मौके पर पहुँचे और तत्काल अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिए। पुछ ताछ में युवती ने अपना नाम असवंतीन उसेण्डी बताया। उसने कहा कि वह कोयलीबेड़ा की है व यहाँ किराये के मकान में रहती है। घर बनाने के लिए पार्षद के द्वारा यह जगह दिखाई गई थी।

अपने लोगों को बचाने नेता डालते है दबाव

भानुप्रतापपुर में वर्षों से अतिक्रमण का खेल जारी है जिनमे कई नेता भी शामिल हैं। ऊँची पहुँच व पैसे से रसूखदार लोग शासकीय भूमि पर कब्जा कर मकान बना लेते हैं जिनपर कोई कार्यवाही नहीं होती। कुछ तो नियम कायदों को तक पर रख कब्जा की गयी भूमि का पट्टा भी बनवा चुके हैं। शासकीय भूमि पर बड़े-बड़े मकान व दुकान बनने के बाद उन्हें बेच दिया जाता है और अन्य जगह पर कब्जा कर फिर से ग्राहकों की तलाश की जाती है। भानुप्रतापपुर में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जो जमीन कब्जा कर बेचने का कार्य करते हैं इनको नेताओं का संरक्षण भी मिलता रहता है। वहीं जब कोई गरीब व जरूरतमंद कही निर्माण कराने जाता है तो उसे प्रशासन सारे नियम कानून बताती हैं और अंततः उसका निर्माण हटवा दिया जाता है। ऐसे मामलों में कोई नेता बचाव के लिए आगे नहीं आता जाहिर है उन्हें गरीब लोगों से कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिलता है। और जो नेताओं की जेब गरम करेगा उसके मकान बिना किसी परेशानी के शासकीय भूमि पर बन जाते हैं।

आप ने प्रशासन पर लगाया था संरक्षण देने का आरोप

आप के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि तीन पीढ़ी से कास्त कर रहे गरीब आदिवासियों की भूमि को प्रशासन दबाव पूर्वक गौठान व सीएमडीसी को आबंटित कर रहा हैं। सन 1973 से जिस भूमि पर गरीब आदिवासी परिवार कास्त कर रहा है उस भूमि को दबाव पूर्वक गौठान के लिए आबंटित कर दिया जाता है। दूसरे मामले में तीन पीढ़ी से जिस भूमि पर आदिवासी परिवार खेती कर रहा है उस भूमि को सीएमडीसी को आबंटित कर दी जाती है।आपत्ति व्यक्त करने पर प्रशासन द्वारा रिकार्ड मांगे जाते हैं। वहीं जब रसूखदारों द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर काम्प्लेक्स व मंजिलों वाली इमारत बनाई जाती है, उन पर प्रशासन मेहरबान हो जाती है। दल्ली रोड़ में कोरोना काल का लाभ उठाते हुए रसूखदारों द्वारा किए जा रहे अवैध अतिक्रमण हटाने व उनके ऊपर कार्यवाही की मांग की गयी थीं। वहीं आप पार्टी के जिला अध्यक्ष हरेश चक्रधारी ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगातार गरीबों का शोषण तथा रसूखदारों को संरक्षण दिया जा रहा है। जिसके कारण लोग आज प्रशासन से तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन यदि अवैध निर्माण कर रहे रसूखदारों पर कार्यवाही नहीं करती तो पार्टी आंदोलन करने को बाध्य होगी।

NEWS27_REPORTER

http://news27.org

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *