राजनांदगांव। हिन्दू युवा मंच जिला इकाई राजनांदगाँव ने मेडिकल स्टॉफ की रिक्त पदों अथवा नई भर्ती करने और उनकी ड्यूटी कोविड केयर सेंटर्स में लगाने संबंधी मांग को लेकर कलेक्टर टीके वर्मा के नाम ज्ञापन सौंपा। मंच ने अपने ज्ञापन के माध्यम से सुझाव दिया है कि, संस्कारधानी नगरी के समाज सेवी संस्थाओं और संगठनों द्वारा कोविड मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने शहर के लगभग आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर कोविड केयर और आइसोलेशन सेंटर्स खोलकर इस आपदा की घड़ी में अपना कर्तव्य पूरा कर दिया है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि उक्त सेंटर्स में मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाएं अथवा नई भर्तियां निकाल कर स्वास्थ्य सेवा बहाल करें, ताकि अधिक से अधिक मरीजों की जान बचाई जा सके।
उक्ताशय की जानकारी देते हुए हिन्दू युवा मँच के जिलाध्यक्ष किशोर माहेश्वरी, जिला उपाध्यक्ष अंकित खंडेलवाल और शहर महामंत्री दीपक भारती ने संयुक्त रूप से बताया कि, संस्कारधानी नगरी में कोरोना संक्रमण से संक्रमित मरीजों को राहत पहुंचाने समाज सेवी संस्थाओं और संगठनों के द्वारा अजीज पब्लिक स्कूल, उदयाचल, प्रेस क्लब भवन, साई हॉस्टल, फतेह सिंह हॉल और अब नगर पालिका निगम के द्वारा रैन बसेरा में कोविड आइसोलेशन सेंटर की स्थापना की है। किन्तु ये सभी कोविड आइसोलेशन सेंटर महज खानापूर्ति के काम ही आ रहे हैं, और किसी धर्मशाला से अधिक की भूमिका नही निभा रहे हैं। यहां पर चाय-नाश्ते और दो समय के भोजन का अच्छा प्रबंध तो किया गया है, किन्तु मेडिकल स्टॉफ या स्वास्थ्य क्षेत्र के किसी जानकार के न होने के कारण ये महज धर्मशाला या विश्रामगृह की भूमिका मात्र निभा रहे हैं। अजीज पब्लिक स्कूल प्रबंधन की अगर बात करें तो यहां पर लगभग 100 बैड और 20 ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था तो की हैं, लेकिन उन सिलेंडर्स का कोई उपयोग इसलिए नहीं हो पा रहा है, क्योंकि वहां पर कोई मेडिकल स्टॉफ या इस क्षेत्र का जानकार व्यक्ति नहीं है, जो सिलेंडर्स का उपयोग करना, मरीजों को ऑक्सीजन चढ़ाना या समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जाँच कर सके। अब तो इन कोविड सेंटर्स की प्रासंगिकता भी खत्म होने लगी है। यही हाल बाकि अन्य कोविड केयर सेंटर्स का है। कई जगह सिर्फ बैड लगाए गए हैं, कहीं पर नाश्ते, और दोनों समय के भोजन का प्रबंध तो है, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर्स नहीं है। तो कहीं भोजन के साथ-साथ ऑक्सीजन सिलेंडर्स का भी प्रबंध किया गया है, किन्तु मरीजों के लिए यह भी नाकाफी है। मेडिकल क्षेत्र के जानकार और स्टॉफ के अभाव में ये सारी व्यवस्था फेल होने लगी है। अगर इसके दूसरे पहलुओं पर गौर करें तो जितनी भी सामाजिक संस्था और समाज सेवक है वो अपना नैतिक कर्तव्य निभा चुके हैं। जिन्हें जो पहल करनी थी अपने स्तर पर कर चुके। अब जवाबदेही प्रशासन की बनती है कि, उपरोक्त स्थानों में मेडिकल स्टॉफ की पदस्थापना करें। इनकी पदस्थापना यदि समय रहते हो जाती है तो यही अनुपयोगी पड़े कोविड केयर और आइसोलेशन सेंटर की प्रासंगिकता कई गुना बढ़ जाएगी और सैकड़ो मरीजों के जीवन की रक्षा के काम आएगी। उपरोक्त सभी कोविड केयर और आइसोलेशन सेंटर्स को मिला लें तो 500 बैड्स के लगभग होगें ही। यदि इन सभी सेंटर्स में मरीजों के अनुपात में मेडिकल स्टॉफ शिफ्ट के हिसाब से पदस्थापना कर दी जाए तो एक बार में 500 से अधिक कोविड मरीजों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा सकता है और उनके जीवन की रक्षा की जा सकती है।
वर्ष 2021 के लिए कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला एवं विकासखंड स्तर पर एएनएमए नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट, स्टॉफ नर्स, आया, फिजियोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर, तकनीकी सहायक, हॉस्पिटल अटेंडेंट, काउंसलर, लैब टेक्नीशियन जैसे 135 विभिन्न पदों पर 22 फरवरी 2021 तक आवेदन मंगाए गए थे। जिनकी भर्ती 20 मार्च 2021 तक सुनिश्चित की जानी थी। आज पर्यन्त भर्ती प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जा सकी है। अगर यह भर्ती प्रक्रिया समय पर पूर्ण हो जाती तो कोरोना की इस भयंकर आपदा में यही स्टॉफ मरीजों के लिए देवदूत साबित हो सकते थे। गौरतलब हो कि, आज की वर्तमान स्थिति को देखें तो प्रति 300 मरीजों के पीछे केवल मात्र एक डॉक्टरव सेवा दे रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल कैसा होगा इसका अनुमान लगाया ही जा सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की उक्त भर्तियों को न जाने किन कारणों के चलते रोक दिया गया। यह तो भगवान ही जाने। यदि समय पर इनकी भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाती है तो इनकी पदस्थापना से काफी राहत मिल सकती थी। अब अगर नई भर्ती के लिए विज्ञापन भी निकाला जाता है तो और भी देर हो सकती है। इससे अच्छा ये है किए पुरानी लंबित प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाया जाए। प्रशासन अपने विवेकानुसार आपदा मोचन और प्रबंधन के तहत नई भर्तियां भी कर सकता है लेकिन सवाल फिर से यही है कि, आखिर भर्ती तो हो।
जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामुदायिक केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पैरा मेडिकल स्टॉफ की कमी दूर करने पैरामेडिकल स्टॉफ के लिए चयन सूची जारी तो कर दी गई है जो कि एक राहत भरी खबर है, किन्तु इनके अतिरिक्त भी जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में जो कोविड केयर और आइसोलेशन सेंटर बनाये गए हैं वहां पर भी मेडिकल स्टॉफ की पदस्थापना भी तो जरूरी है। भले ही इनकी पदस्थापना अल्पकालिक अथवा कोरोना संक्रमण के प्रभाव रहने तक ही क्यों न हो। वरना यहां पर भी थोथा चना, बाजे घना जैसी उक्ति चरितार्थ होने लगेगी। वहीं जिला खनिज कोष मद के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी जो भर्तियां निकाली गई थी, इसकी भर्ती प्रक्रिया भी आज पर्यन्त पूर्ण नही की जा सकी है। इसकी भर्ती प्रक्रिया भी जल्द पूर्ण कर लेनी चाहिए थी। यह शासन की उदासीनता और लचर व्यवस्था का हाल बयां करती है।
मरीज यहां पर पिकनिक मनाने नही बल्कि कोरोना संक्रमण से निजात पाने की उम्मीद से आना चाहता है। यदि मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और अनुभवी मेडिकल स्टॉफ की सेवाएं प्राप्त हो जायें तो हॉस्पिटल की कमी भी नही खलेगी, और बहुत सारे मरीज इन कोविड केयर और आइसोलेशन सेंटर्स से ठीक होकर वापस अपने घर लौटेंगे। इससे उन संस्थाओं की साख भी बढ़ेगी और इस विवेकपूर्ण निर्णय से जिला प्रशासन की भी वाहवाही होगी। अगर इसके बाद भी शासन का वहीं उदासीन और ढूलमुल भरा रवैय्या रहा तो एक नहीं बल्कि एक हजार कोविड केयर सेंटर और आइसोलेशन सेंटर ही क्यों न खोल लें। इनकी उपयोगिता शून्य की शून्य ही रहेगी। यह पहल मरीजों के लिए तब तक जीवनदायिनी साबित नहीं हो सकती हैं। जब तक मेडिकल स्टॉफ की पर्याप्त संख्या में पदस्थापना न हो। पता नहीं इतने महत्वपूर्ण बिन्दु पर प्रशासन मौन रहा। क्यों भर्ती प्रक्रिया लंबित रखी गई। खैर अगर तब उस भर्ती की आवश्यकता भले ही न रही हो, लेकिन कोरोना की लगातार बढ़ती इस भयंकर त्रासदी को देखते हुए नये मेडिकल स्टॉफ की भर्ती तो की ही जा सकती है, अथवा पुरानी रुकी हुई प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रशासन को इस पर जल्द ही निर्णय लेना चाहिए।
हम यह भूल रहे हैं कि, कोरोना वायरस की पुरानी लहर की तुलना में उसकी यह दूसरी लहर कितनी घातक और जानलेवा है। इसके लिए इतनी व्यवस्था काफी नहीं है। पहली लहर के वायरस ने इतनी तबाही नहीं मचाई थी, इतनी बड़ी संख्या में मौतें भी नहीं हुई थी। तब मरीज घर बैठे हंस खेलकर ही ठीक हो जा रहे थे, किन्तु आज की स्थिति दूसरी है। हम पुराने वायरस की तरह ही इसे कमजोर समझने की हम भूल कर रहे हैं।

अगर जल्द ही इस पर कोई अहम फैसला नहीं लिया गया तो, स्थिति और भी भयावह हो सकती है। ज्यादा विलंब न करते हुए मेडिकल स्टॉफ की तत्काल भर्ती की जाए। आवश्यकतानुसार उनकी पदस्थापना मेडिकल कॉलेज, एकलव्य विद्यालय, सोमनी गर्ल्स हॉस्टल, अजीज पब्लिक स्कूल, उदयाचल, प्रेस क्लब भवन, फतेह सिंह हॉल, साई हॉस्टल और रैन बसेरा में की जानी चाहिए, ताकि मरीजों के जीवन की रक्षा का संकल्प पूरा हो सके

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