फिजियोथैरिपी चिकित्सा कोविड पेशेन्ट के लिए बना जीवनदान

डॉ. भुवनेश्वर घृतलहरे का परामर्श

रायपुर।कोरोना वायरस के सेकेन्ड फेस में एक ओर जहां लोगों को लॅन्गस मे गम्भीर इन्फेक्शन हो रहे है वहीं जनहानि भी गत वर्ष की अपेक्षा अधिक है। ऐसी स्थिति में कोरोना से बचाव एवं रोकथाम के सुझाव होम आइसोलेशन कन्ट्रोल रूम के चिकित्सक डॉ. भुवनेश्वर घृतलहरे( फिजियोथेरेपिस्ट ) नियमित चिकित्सकीय परामर्श के साथ फिजियोथैरिपी चेस्ट एक्सरसाइज़ को भी सजेस्ट कर रहे हैं । उनका कहना है कोविङ का यह स्ट्रेन हमारे फेफड़ो पर डायरेक्ट अटैक कर रहा है ऐसी में फेफड़ो को मजबूत व सुचारू रूप से बेहतर कार्य करने वाले फिजियोथैरिपी चिकित्सा चेस्ट एक्सरसाइज़ थेरेपी करनी चाहिए ।

आक्सीजन का लेवल मेनटेन रखने और उसे बढ़ाने के लिए निम्न एक्सरसाइज़ बहुत ही फायदेमंद होता है ।जिसमें ङेली वर्कआउट के साथ साथ सेगमेंटल ब्रीदिन्ग, थोरेसिक एक्पेन्सन , स्पाइरोमेटरी,डायाफ्राम ब्रीदिन्ग,सिक्स मिनट वाक् टेस्ट इत्यादि को आसानी से घर में भी किया जा सकता है ।

  • सेगमेंटल ब्रीदिन्ग एक्सरसाइज़:-इसमें लॅन्गस के तीनों भागों में आक्सीजन के प्रवाह को बढाया जाता है ।

विधि-

अपर पोजीशन में दोनों हाथों को क्रास करके गर्दन के नीचे के हिस्से में रखते हैं और सांस को लॅन्गस से नीचे की ओर प्रेशर देकर छोड़ते है ।लेटरल पोजीशन में दोनों हाथों को कमर पर रखकर सांस लेते हैं और लॅन्गस के निचले हिस्से तक लेजाकर छोड़ते है ।अपर पोस्टिरियर सेगमेंट में हाथों को गर्दन के पास से स्केपुला के ऊपर ले जाते हैं और गहरी सांस लेकर छोड़ते है। इस प्रकिया से लॅन्गस मे आक्सीजन का सेचुरेशन बढता है ।

  • डायाफ्राम बीर्दिग एक्सरसाइज़:-कुछ लोगों का साँस लेते समय पेट फुलता है इस टेक्निक में फेशेन्ट को साँस लेते समय पेट नहीं फुलाने दिया जाता हैं और सांस छोड़ते समय पेट को अन्दर दबाकर रखने के लिए कहा जाता है, इससे लॅन्गस कम्पलीट वर्किंग में आते हैं और आवश्यकतानुसार आक्सीजन फेफङो को मिल जाता है ।
  • स्पाइरोमेटरी एक्सरसाइज़:-इसमें मशीनों द्वारा लॅन्गस मे आक्सीजन का फ्लो बढाया जाता है ,तीन वाल्व वाली मशीन होता है जिसमें ब्रीद इन और ब्रीद आउट की प्रकिया को आसान और सुगम्य बनाया जाता है, इस प्रकिया से बाङी मे आक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है ।
  • थोरेसिक एक्पेन्सन एक्सरसाइज़:-सीधे लेटकर गहरी सांस लेना और उसे छोङना ,, सांस लेते हुए घुटने को मोङना और सांस छोड़ते हुए घुटने को वापस स्थिति में लाना है इसी तरह हाथों को मोङना और वापस उसी स्थिति में लाना इससे प्रेशर के साथ आक्सीजन फेफड़ों में पहुचते है।
  • एक्टिव लोवर लिम्ब मोवमेन्ट:- इसमें मसल्स को एक्टिव करके शरीर में आक्सीजन की डिमांड को बढ़ाया जाता है जिससे लॅन्गस को आक्सीजन जेनरेट करने के लिए एक्सट्रा वर्क करना पड़ता है।
  • सिक्स मिनट वाक् टेस्ट:-इस टेस्ट से फेफङो के कामकाज की मूल्यांकन किया जाता है । पल्स आक्सीमीटर को अपने तर्जनी या मध्यमा ऊँगली मे रखकर रिङीग लिया जाता है(95% से अधिक सामान्य)।समान सतह पर 6 मिनट वाक् करे।अगर आक्सीजन का स्तर नीचे नहीं जाता तो आप स्वस्थ है।यदि आपके आक्सीजन( 02) स्तर 93% कम हो रहा हो और सांस लेने में तकलीफ हो तो तत्काल अपने चिकित्सक या होम आइसोलेशन कन्ट्रोल रूम मे सम्पर्क करें।


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