By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गूकोंदल।जैव विविधता के संरक्षण से ही मानव जीवन सुरक्षित रहेगा,इसलिए प्रकृति को बचाना हम सबका सर्वोच्च कर्तव्य है।
उक्त बातें जंगोरायतार विद्या केतुल दमकसा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर उपस्थित अतिथियों के द्वारा कही गई।
पर्यावरणविद् शेरसिंह आचला के अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रूपसिंह कोमरा ने कहा कि आज वातावरण बहुत तेज गति से परिवर्तित हो रही है और इसका पारिस्थितिकीतंत्र पर बुरा असर पड़ रहा है इसलिए प्रकृति का संरक्षण करना बहुत आवश्यक है, यदि हम अंधाधुंध प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करेंगे तो निश्चित रुप से हम विनाश को आमंत्रित कर रहे हैं।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने कहा कि जैवविविधता को संरक्षित करके ही हम मानव जीवन को सुरक्षित कर सकते हैं यदि प्रकृति में जैवविविधता को क्षति होती है तो इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ेगा।आज वनों के अंधाधुंध कटाई व खेतों में बेहिसाब रासायनिक खादों के उपयोग से जैवविविधता को काफी नुकसान हो रहा है जिसका परिणाम हम सबके सामने दिखाई दे रहा है। उन्होंने आगे कहा कि छोटे से छोटे जीव व पेड़-पौधे पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं इसलिए इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सबको लेनी चाहिए।

वन विभाग के चंद्रदेव कोड़ोपी ने वनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वन से ही हमारा जीवन है इससे हमें जीवनोपयोगी फल-फूल व वनौषधियाँ, वनोपज प्राप्त होती हैं, वर्षा करने में भी वन सहायक होते हैं, ये वन हमारे लिए बहुमूल्य हैं इसलिए पेड़-पौधे लगाकर इनकी सुरक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। सभा में सरपंच धरमसिंह दुग्गा, पुनऊ दुग्गा,रविंद्र दुग्गा, ने भी अपना विचार रखा ।
इस अवसर पर डिप्टी रेंजर संतोष दुग्गा, लोकेश उयके, संपत दुग्गा, मनोज मंडावी, सावित्री मंडावी, ओमप्रकाश दुग्गा, संतु दुग्गा,कन्हैया पुड़ो, रमेश कोमरा, भरत आचला प्रमुख रुप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ओमप्रकाश दुग्गा ने किया।

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