दुर्गुकोंदल : आजादी के 74 वर्ष बाद भी गांव में पुल नही बना, जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर ,  लकड़ी का पुल  किया तैयार

By।शिवचरण सिन्हा

शासन, प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि की अनदेखी

दुर्गुकोंदल 23 मई।ब्लाक मुख्यालय के ग्राम पंचायत बांगाचार गांव समीप एक नाला पड़ता है।जिसमें ग्राम वासियों के सहयोग एवं श्रमदान से प्रतिवर्ष अस्थाई लकड़ी का पूल तैयार करते हैं।आजादी के 74 वर्ष बाद भी इस ग्राम में पुल नहीं बन पाना शासन प्रशासन की कमजोरी को दर्शाता है।बांगाचार के निवासियों द्वारा प्रतिवर्ष लकड़ी का अस्थायी पुलिया तैयार करना मजबूरी हो गई है क्योंकि इस नाले में अस्थाई पुल अगर नहीं बनाया जाता है तो बांगाचार के ग्रामवासीयो को बरसात के दिनों में ब्लॉक मुख्यालय एवं अन्य जगहों के संपर्क से पूरी तरह टूट जाएंगे। इस संबंध में सरपंच गुलाब बघेल ने बताया की हमारे गांव समीप नाला में आज तक पुलिया नहीं बन पाया है जिसके चलते हमें आने जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पुलिया निर्माण के संबंध में ग्राम पंचायत एवं ग्रामीणो द्वारा कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से शासन प्रशासन को अवगत कराया गया है।पर भी इस ग्राम में जनप्रतिनिधि एवं शासन प्रशासन द्वारा अनदेखी का खेल सदियों से चलते आ रहा है।जिसके चलते हम जान जोखिम में डालकर नाला पार करने में मजबूर हैं। प्रतिवर्ष बरसात आने के पहले ग्राम वासियों के सहयोग से श्रमदान करके लकड़ी का स्थाई पुलिया निर्माण करते हैं।जोकि चार से पांच महीना तक ठीक रहता है।उसके बाद लकड़ी कमजोर एवं वजन गाड़ियों की आवाजाही होने के कारण पुलिया पूरी तरह टूट जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि इस आस्थाई पुलिया में कई हादसे हो चुके हैं लेकिन किस्मत अच्छी है कि किसी की जान मानहानि नुकसान नहीं हुई है।पिछले वर्ष इंडेन गैस भरी मेटाडोर लकड़ी की पुलिया में बल्ली टूटने की वजह से फंस गई थी उसके कुछ दिनों पश्चात जेसीबी मशीन एवं कार वाहन फंसी हुई थी।अगर यह वाहन पुलिया के नीचे गिरते तो जान माल की हानि होती।

ग्रामवासी राजकुमार बघेल नंद कुमार धीराजी राम जैतलाल मनीराम ने बताया कि चार महीना पहले इस क्षेत्र के विधायक का दौरा कोदापाखा में हुई थी।जिसको हम समस्त ग्रामवासी पुलिया के संबंध में लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया लेकिन जनप्रतिनिधियो द्वारा मात्र आश्वासन ही मिलते आ रहा है । आजादी के 74 वर्ष बाद भी हमारे ग्राम समीप नाला में पुलिया निर्माण जनप्रतिनिधि एवं शासन प्रशासन के द्वारा नहीं कराया जाना उनकी संवेदना को दर्शाता है।

उन्होंने आगे बताया कि हम आवेदन निवेदन करते करते थक चुके हैं हमें जनप्रतिनिधि एवं शासन प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं दिख रही है, इसी वजह से हम प्रतिवर्ष ग्राम वासियों के सहयोग एवं श्रमदान से अस्थाई लकड़ी का पुलिया बनाने को मजबूर है। किस लकड़ी का पुल है तैयार करने में सुखदेव सोनाराम राजेंद्र झाडूराम संतराम जगत राम भगत राम धर्म सिंह चेनू राम मेनू राम चेतराम एवं समस्त ग्राम वासियों का विशेष योगदान रहा।

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